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टीईटी से छूट समेत 13 सूत्रीय मांगों को लेकर शिक्षकों ने मुख्यमंत्री धामी से की मुलाकात, न्यायसंगत समाधान का मिला आश्वासन

उत्तराखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर शिक्षकों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान संघ ने मुख्यमंत्री को 13 सूत्रीय मांगपत्र सौंपते हुए विशेष रूप से आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से छूट देने की मांग उठाई। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि सरकार सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है और टीईटी से छूट के विषय में न्यायसंगत समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त किए गए शिक्षकों ने उस समय की सभी निर्धारित पात्रताओं के आधार पर सेवा ग्रहण की थी। ऐसे में वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अब टीईटी की अनिवार्यता लागू करना व्यावहारिक और न्यायसंगत नहीं है। संघ का कहना है कि इस विषय पर सरकार को मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए पुराने शिक्षकों को राहत प्रदान करनी चाहिए।

बैठक के दौरान शिक्षक संघ ने केवल टीईटी का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों को भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। संघ ने राज्य में पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग दोहराते हुए कहा कि नई पेंशन व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों और शिक्षकों में लंबे समय से असंतोष है। शिक्षकों का मानना है कि पुरानी पेंशन योजना उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है।

प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षकों के स्थानांतरण (तबादला) प्रक्रिया में मौजूद विसंगतियों को दूर करने की भी मांग की। उनका कहना था कि तबादला नीति को अधिक पारदर्शी, व्यावहारिक और न्यायसंगत बनाया जाए ताकि शिक्षकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही शिक्षकों ने गोल्डन कार्ड योजना से जुड़ी समस्याओं की ओर भी मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया और योजना में आवश्यक सुधार करने की मांग रखी, जिससे शिक्षक और उनके परिवार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

शिक्षक संघ ने यह भी कहा कि शिक्षकों पर लगातार बढ़ रहे गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ उनकी शिक्षण गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने मांग की कि शिक्षकों को केवल शिक्षा और विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास से जुड़े कार्यों तक सीमित रखा जाए, जबकि अन्य प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों के लिए अलग व्यवस्था की जाए।

नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी प्रतिनिधिमंडल ने अपने सुझाव मुख्यमंत्री के समक्ष रखे। संघ ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप अकादमिक संस्थानों के ढांचे का पुनर्गठन किया जाए तथा प्राथमिक शिक्षा में शिक्षकों के पर्याप्त पद सृजित किए जाएं, ताकि विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा सके और शिक्षकों पर कार्यभार का संतुलित वितरण हो।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिनिधिमंडल की सभी मांगों को गंभीरता से सुना और कहा कि राज्य सरकार शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशील है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि टीईटी की अनिवार्यता सहित अन्य सभी मुद्दों का विधिक और प्रशासनिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए परीक्षण किया जाएगा तथा न्यायसंगत समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और सरकार उनके हितों की अनदेखी नहीं करेगी।

मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में प्राथमिक शिक्षक संघ के देहरादून जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह रावत, टिहरी जिलाध्यक्ष चंद्रवीर सिंह नेगी, चमोली के दिगंबर सिंह नेगी, उत्तरकाशी के जयदेव राणा, अल्मोड़ा के किशोर जोशी, नौगांव ब्लॉक अध्यक्ष विजेंद्र विश्वकर्मा, युद्धवीर सिंह बिष्ट, सतीश चंद्र रमोला, प्रकाश जोशी सहित विभिन्न जिलों के अनेक पदाधिकारी शामिल रहे।

शिक्षक संघ को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर लंबे समय से लंबित मुद्दों का समाधान करेगी, जिससे शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा और प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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Hill Mail

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