लंबित मांगों को लेकर जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ का आक्रोश अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। सोमवार को संघ की जिला इकाई ने देहरादून में परेड ग्राउंड से जिलाधिकारी कार्यालय तक विशाल रैली निकालकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने टीईटी से छूट, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, पदोन्नति व्यवस्था और वेतन विसंगतियों समेत 13 सूत्रीय मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजा।
रैली में बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। हाथों में बैनर और तख्तियां लिए शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। शिक्षकों का कहना था कि लंबे समय से वे अपनी समस्याओं को लेकर शासन और विभागीय अधिकारियों के समक्ष गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है। इससे शिक्षकों में भारी नाराजगी और असंतोष व्याप्त है।
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिला महामंत्री अश्वनी कुमार भट्ट ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उस समय नियुक्त शिक्षकों ने नियमानुसार सेवाएं शुरू की थीं, लेकिन अब उन पर टीईटी की अनिवार्यता थोपना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए जल्द निर्णय लेना चाहिए।
संघ पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आगामी 29 मई को प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में धरना प्रदर्शन किया जाएगा, जबकि 8 जून को सचिवालय कूच का कार्यक्रम प्रस्तावित है।
शिक्षकों की प्रमुख मांगों में बेसिक शिक्षकों को त्रिस्तरीय ढांचे के अंतर्गत पीआरटी, टीजीटी और पीजीटी का लाभ देना, सेवाकाल में तीन पदोन्नतियां सुनिश्चित करना, पुरानी पेंशन योजना को बहाल करना और 17140 वेतनमान की वसूली पर रोक लगाना शामिल है। इसके अलावा शिक्षकों ने विभागीय विसंगतियों को दूर करने और सेवा संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान की भी मांग उठाई।
संघ नेताओं का कहना है कि शिक्षक लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे शिक्षकों का मनोबल प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान समय रहते नहीं हुआ तो इसका असर शैक्षिक व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
रैली के दौरान शिक्षकों ने सरकार से संवाद स्थापित कर समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे संघर्ष नहीं, बल्कि सम्मानजनक समाधान चाहते हैं। हालांकि लगातार अनदेखी के चलते अब आंदोलन का रास्ता अपनाना उनकी मजबूरी बन गया है।
इस दौरान संघ के अध्यक्ष सूरज मन्द्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विशाल सिंह सिंधवाल, कोषाध्यक्ष सुरक्षा चौहान, वरिष्ठ संयुक्त मंत्री अनूप कुमार भट्ट, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष उमेश चौहान, प्रदेश संरक्षक सतीश घिल्डियाल, अतुल शर्मा, विपिन मेहता, सुभाष चौहान, दुर्गा चौहान, राजेश डोभाल, हुकम तोमर, अजय राणा, प्रीतम चौहान, मोहनलाल शर्मा, बीरबल, मुजमिल, विजया शर्मा और सुशील सेमवाल समेत बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।
शिक्षकों के इस आंदोलन ने शिक्षा विभाग और सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार शिक्षकों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और प्रस्तावित आंदोलनों से पहले कोई समाधान निकल पाता है या नहीं।








