इस ऐतिहासिक अभियान का नेतृत्व देहरादून निवासी मेजर अखिलेश भट्ट ने किया। मूल रूप से टिहरी गढ़वाल के घनसाली क्षेत्र से संबंध रखने वाले मेजर अखिलेश भट्ट ने अपने अदम्य साहस और रणनीतिक नेतृत्व से पूरी टीम को सफलता के शिखर तक पहुंचाया। उनके पिता श्री दिनेश प्रसाद भट्ट हैं और परिवार सहित पूरा उत्तराखंड आज उनकी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है।
मेजर अखिलेश भट्ट के साथ अभियान में उत्तराखंड के कई अन्य वीर जवान भी शामिल रहे, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। अभियान में अभियान उपनेता की जिम्मेदारी पौड़ी गढ़वाल के ग्राम कंडाई निवासी सूबेदार सुरेश कुमार बेबनी ने निभाई। वे श्री शंभू प्रसाद बेबनी के पुत्र हैं। इसके अलावा चमोली जिले के ग्राम सेरा निवासी नायक राहुल सिंह, अल्मोड़ा के ग्राम ल्वेशाल निवासी नायक पंकज सिंह दोसाद और उत्तरकाशी के कमांडो गौतम बुटोला भी इस सफल अभियान का हिस्सा रहे।
एवरेस्ट विजय की यह कहानी केवल 20 दिनों की नहीं, बल्कि महीनों की कठोर तैयारी, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। अक्टूबर 2025 में मेजर अखिलेश भट्ट के नेतृत्व में ही टीम ने गढ़वाल हिमालय स्थित 7075 मीटर ऊंचे माउंट सतोपंथ का सफल आरोहण किया था। इसके बाद टीम ने हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति क्षेत्र में डोगरा स्काउट्स के साथ कठिन शीतकालीन बर्फ प्रशिक्षण लिया। इसी दौरान 5975 मीटर ऊंचे माउंट कानामो को भी फतह किया गया। इन अभियानों ने टीम को एवरेस्ट जैसी चुनौती के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार किया।
माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई केवल शारीरिक क्षमता का परीक्षण नहीं होती, बल्कि यह धैर्य, रणनीति, तकनीकी दक्षता और मानसिक मजबूती की भी सबसे बड़ी परीक्षा मानी जाती है। बर्फीली हवाएं, ऑक्सीजन की कमी और माइनस तापमान जैसी परिस्थितियों के बीच NSG टीम ने जिस साहस के साथ यह मिशन पूरा किया, वह हर भारतीय के लिए प्रेरणा है।
NSG के प्रवक्ता ने इस उपलब्धि को संगठन के ध्येय वाक्य “सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा” का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि मेजर अखिलेश भट्ट और उनकी टीम ने यह साबित कर दिया कि भारतीय जवान किसी भी चुनौती को पार करने में सक्षम हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी टीम का मनोबल ऊंचा रहा और सभी सदस्य एकजुट होकर लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे।
उत्तराखंड के पहाड़ों में पले-बढ़े इन जवानों ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि कठिनाइयां चाहे कितनी भी बड़ी हों, यदि इरादे मजबूत हों तो हर शिखर को छुआ जा सकता है। यह उपलब्धि केवल NSG की जीत नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की गौरवगाथा है। देवभूमि के इन सपूतों ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराकर देश का मान बढ़ाया है।
इस अभियान ने उत्तराखंड के युवाओं में भी नया उत्साह जगाया है। यह सफलता उन्हें यह प्रेरणा देती है कि मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। आज पूरा देश और उत्तराखंड सरकार इन वीर जवानों को सलाम कर रही है, जिन्होंने एवरेस्ट की ऊंचाइयों पर भारत का गौरव और देवभूमि का स्वाभिमान दोनों लहराया।


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