जानकारी के अनुसार, मूल रूप से ऊधमसिंह नगर जिले के खटीमा स्थित अमाऊ गांव निवासी भूपेंद्र सिंह चुफाल (48) वर्तमान में परिवार सहित दिल्ली के द्वारका क्षेत्र में रहते थे। उनका लखनऊ में मेडिकल और दवा कारोबार था। बृहस्पतिवार को वह अपनी पत्नी सीमा कैड़ा चुफाल (45), बेटे वासु (19) और बेटी रावी (12) के साथ भवाली के पास स्थित दूनीखाल जा रहे थे। परिवार वहां अपने रिश्तेदार राजेश रावत के कैंप साइट पर छुट्टियां बिताने पहुंच रहा था।
बताया जा रहा है कि उनकी महिंद्रा एक्सयूवी इलेक्ट्रिक कार चालक अनुज कुमार मिश्रा (34) चला रहा था, जो लखनऊ के अफसर नगर क्षेत्र का निवासी था। दोपहर करीब एक बजे भवाली-सेनिटोरियम-रातीघाट बाईपास मार्ग पर कैलागांव के पास अचानक कार अनियंत्रित हो गई और लगभग 300 फीट गहरी खाई में जा गिरी।
हादसे की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने के कारण पुलिस और राहत दल को सूचना देने में कुछ समय लग गया। सूचना मिलते ही भवाली पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय लोगों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान शुरू किया। दुर्गम खाई और कठिन रास्ते के बीच करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद रस्सियों के सहारे सभी को सड़क तक लाया गया, लेकिन तब तक पांचों की मौत हो चुकी थी।
हादसे के बाद एक और गंभीर सवाल सामने आया। बताया गया कि घटना के करीब दो घंटे बाद तक भी 108 एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से शवों को निजी वाहनों से भवाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।
इस हादसे ने परिवार और रिश्तेदारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों के मुताबिक, भूपेंद्र सिंह चुफाल बेहद मिलनसार और परिवार प्रेमी व्यक्ति थे। उनका बेटा वासु बीबीए की पढ़ाई कर रहा था, जबकि बेटी रावी स्कूल में पढ़ती थी। परिवार छुट्टियों में कुछ सुकून के पल बिताने उत्तराखंड आया था, लेकिन यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन गया।
हादसे के बाद कैंप साइट संचालक और मृतक के साले राजेश रावत तथा उनके परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे क्षेत्र में इस दर्दनाक घटना को लेकर शोक की लहर है। स्थानीय लोगों ने पहाड़ी मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और आपातकालीन सेवाओं को और अधिक सक्रिय बनाने की मांग उठाई है।


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