उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के आर्थिक सलाहकार आलोक भट्ट (Alok Bhatt) ने कहा है कि जिस तरह से उत्तराखंड की आपदा के बाद राज्य को फिर से खड़ा किया गया, उसी तरह से कोरोना संकट भी एक और अवसर है। हालांकि इस बार आर्थिक नुकसान हुआ है। सबसे पहले हमें अपनी ताकत और कमजोरी को समझना होगा, ये देखना होगा कि हमारे लिए अवसर और चुनौतियां क्या हैं।
उन्होंने कहा कि पैकेज में हमें देखना होगा कि केंद्र की योजनाओं को कैसे हम बेहतर तरीके से संचालित कर सकें। सरकार मछली पालन को काफी बढ़ावा दे रही है, जिसमें काफी काम हो सकता है। कृषि से ही जुड़े मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्र में संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि अभी फोकस यह होना चाहिए कि हमारे लोग जो लौट आए हैं उन्हें रोजगार कैसे दिया जाए।
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जो लोग लौटे हैं उनमें एक वर्ग को अच्छी सैलरी मिल रही है, जो कंपनियां शुरू होने पर वापस चले जाएंगे। दूसरा समूह उन लोगों का है जो 5 से 10 हजार रुपये कमाते हैं और उन्हें समझाया जा सकता है कि यहां भी मौके मिल सकते हैं। आलोक भट्ट ने कहा कि हमें रणनीति नए सिरे से बनानी होगी। उदाहरण के तौर पर उन्होंने कहा कि दूसरे किसी पहाड़ी क्षेत्र में जाएंगे तो वहां स्थानीय गाड़ियां यात्रा में लगती हैं लेकिन उत्तराखंड में ऐसा नहीं है। यहां दिल्ली से ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था कर ली जाती है।
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भट्ट ने कहा कि मनरेगा में काफी फंड आया है। इसमें देखना होगा कि प्रोडक्टिव एसेट कैसे तैयार हो। उन्होंने कहा कि पानी की समस्या को दूर करने के लिए राज्य में चाल-खाल बनती थी। अब मनरेगा से उसे बनाया जा सकता है, जिससे रोजगार भी मिल सकता है और उसका उपयोग भी काफी है। शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग टर्म के हिसाब से रणनीति बनानी होगी।


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