Monday , 14 September 2026
Home उत्तराखंड न्यूज़ उत्तराखंड पर्यटन द्वारा ‘ट्रेक ऑफ द ईयर 2025–26’ की घोषणा – रोमांच, प्रकृति और संस्कृति का संगम
उत्तराखंड न्यूज़ताज़ा ख़बरदेश-विदेशदेहरादूनपर्यटन समाचार

उत्तराखंड पर्यटन द्वारा ‘ट्रेक ऑफ द ईयर 2025–26’ की घोषणा – रोमांच, प्रकृति और संस्कृति का संगम

पर्यटन विभाग द्वारा साहसिक पर्यटन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने वर्ष 2025–26 के लिए तीन बेहतरीन ट्रेक्स को ‘ट्रेक ऑफ द ईयर’ घोषित किया है।

उत्तराखंड, जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने वर्ष 2025–26 के लिए तीन बेहतरीन ट्रेक्स को ‘ट्रेक ऑफ द ईयर’ घोषित किया है। इस पहल का उद्देश्य शीतकाल के दौरान भी पर्यटकों को आकर्षित करना और राज्य की आर्थिकी को बढ़ावा देना है।

घोषित ट्रेक्स की सूची

पर्यटन विभाग द्वारा चुने गए ये ट्रेक्स न केवल प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर हैं, बल्कि रोमांच, चुनौती और सांस्कृतिक समृद्धि का अनुभव भी कराते हैं:

बन्कटीया ग्लेशियर (पिथौरागढ़) – ऊंचाई 11,811 फीट : यह ट्रेक कुमाऊं क्षेत्र के पिथौरागढ़ जिले में स्थित है और नंदा देवी बायोस्फीयर के नजदीक आता है। ग्लेशियर के रास्ते में बुग्याल (ऊंचे घास के मैदान), जलप्रपात और दुर्लभ हिमालयी वनस्पतियाँ देखी जा सकती हैं।

चेनाव वैली (चमोली) – ऊंचाई 12,998 फीट : यह ट्रेक कम प्रचलित किंतु अत्यंत सुंदर घाटी से होकर गुजरता है, जो अलकनंदा और नंदा घूंघटी क्षेत्र के मध्य है। यह स्थान सर्दियों में बर्फ की चादर से ढक जाता है और बर्फ प्रेमियों के लिए आदर्श है।

गुलाबी कांठा (उत्तरकाशी) – ऊंचाई: 12,431 फीट : ‘गुलाबी कांठा’ नाम ही इसकी सुंदरता को बयान करता है। यह ट्रेक गढ़वाल के सबसे सुंदर हाई-एल्टीट्यूड ट्रेक्स में से एक है, जहां से बंदरपूंछ और गंगोत्री रेंज के नज़ारे अद्भुत दिखाई देते हैं।

यह विशेष ट्रेकिंग अभियान सितंबर 2025 से मार्च 2026 तक चलेगा — जो कि ट्रेकिंग के लिए सबसे उपयुक्त मौसम होता है।

टूर ऑपरेटर्स के लिए प्रोत्साहन योजना

उत्तराखंड सरकार ने निजी पर्यटन सेवाओं को भी इस अभियान में जोड़ने के लिए प्रोत्साहन नीति लागू की है:

प्रति ट्रेकर ₹2,000/- की प्रोत्साहन राशि
राज्य में रजिस्टर्ड टूर ऑपरेटर्स को प्रति प्रतिभागी के हिसाब से यह राशि दी जाएगी। ध्यान दें, यह “पहले आओ, पहले पाओ” के सिद्धांत पर आधारित है।

स्थानीय सहभागिता को बढ़ावा
प्रत्येक ट्रेकिंग ग्रुप में 2:1 का अनुपात अनिवार्य किया गया है — यानी हर दो उत्तराखंड निवासी ट्रेकर पर एक बाहरी ट्रेकर अनुमन्य होगा। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।

अधिक जानकारी कहां से प्राप्त करें?

इच्छुक ट्रेकर्स या टूर ऑपरेटर्स संबंधित जिलों के पर्यटन विकास अधिकारी (DTDO) से संपर्क कर सकते हैं :

• पिथौरागढ़
• चमोली
• उत्तरकाशी

साथ ही, विस्तृत दिशा-निर्देश और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी उत्तराखंड पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है: www.uttarakhandtourism.gov.in

उत्तराखंड पर्यटन का संदेश

‘उत्तराखंड — जहां रोमांच मिलता है आस्था और संस्कृति से।’ यह नारा न केवल राज्य की पहचान है, बल्कि हर उस व्यक्ति के अनुभव का सार है जो हिमालय की गोद में कदम रखता है।

इस वर्ष के ट्रेक ऑफ द ईयर अभियान में भाग लेकर आप न केवल प्रकृति की गोद में आत्मिक शांति पा सकते हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों की आजीविका में भी योगदान दे सकते हैं। चाहे आप अनुभवी ट्रेकर हों या पहली बार हिमालय की ओर कदम बढ़ा रहे हों — ये ट्रेक्स आपके लिए यादगार साबित हो सकते हैं।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

छह वर्षों में 30,286 लाभार्थियों तक पहुंचा उद्यान विभाग की योजनाओं का लाभ

पर्वतीय क्षेत्रों में बागवानी को किसानों की आजीविका का बेहतर माध्यम बनाने...

ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से साहीवाल गाय ने दिया बद्री बछिया को जन्म

गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर और राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान...