उत्तराखण्ड प्रधान संगठन के आह्वान पर प्रदेशभर के प्रधान आंदोलित हैं। जनपद चमोली समेत पूरे प्रदेश के प्रधानों ने कॉमन सर्विस सेंटर को न्याय पंचायत स्तर से खोलने को लेकर एवं उनका मानदेय 2500 रुपये ग्राम पंचायत निधि से देने के खिलाफ एक घंटे का सांकेतिक प्रदर्शन और धरना दिया। कोरोना काल के कारण यह धरना प्रधानों ने अपने-अपने घरों में दिया जिससे सामाजिक दूरी के नियमों का पालन हो सके।
कुछ दिन पूर्व पंचायती राज निदेशक एलं विभाग ने यह फरमान जारी किया गया था। इसी के विरोध में प्रधानों में आक्रोश बना हुआ है। शनिवार को जनपद चमोली के सभी विकासखण्डों के सभी ग्राम प्रधानों द्वारा इसका विरोध किया गया।
प्रधान संघ की यह मांग है कि csc सेंटर प्रत्येक ग्राम पंचायतों में खुलना चाहिए और इनको दिया जाने वाला मानदेय सरकार पंचायत मद से न देकर अपने मद से दे क्योंकि पहाड़ की भौगोलिक परस्थिति विकट है। एक ग्राम पंचायत से एक न्याय पंचायत मुख्यालय की दूरी 50 किलोमीटर से अधिक है। अभी तक csc के माध्यम से कोई भी पंचायत का कार्य नहीं किया गया है। इसी कारण प्रधान संघ इस बात का विरोध कर रही है।
29 मार्च की वर्चुअल मीटिंग में प्रदेश अध्यक्ष भाष्कर सम्मल, प्रदेश महामंत्री प्रताप रावत, मोहन नेगी, कुंडल महर, हिमांशु खाती, मनोहर आर्य, प्रकाश मेहरा, पुष्पा रावत, कमल रावत, रवींद्र राणा, श्याम सुंदर सोन, भूपेंद्र आदि पदाधिकारी और प्रधान उपस्थित रहे।
इराणी से मोहन नेगी







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