कोरोना काल में ब्लैक फंगस के मामले बढ़ने के कारण उसके इलाज में इस्तेमाल किए जाने वाले इंजेक्शन एंफोटेरिसीन-बी की डिमांड भी बढ़ गई। अब प्रदेश सरकार ने इसकी खरीद रोक दी है। अधिकारियों ने बताया है कि इस इंजेक्शन से किडनी पर बुरा प्रभाव पड़ने की बात सामने आ रही है। ऐसे में एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद खरीद रोकने का फैसला किया गया।
एंफोटेरिसीन-बी इंजेक्शन का उत्पादन सिडकुल स्थित एक फार्मा कंपनी ही कर रही है। मई में 15 हजार इंजेक्शन का पहला खेप सरकार ने खरीदा था। इसके बाद और ऑर्डर दिया गया लेकिन इंजेक्शन के साइड इफेक्ट की बात सामने आ रही है ऐसे में खरीद रोक दी गई है।
एंफोटेरिसिन-बी की तुलना में डॉक्टर लिपोसोमल को ज्यादा सही बता रहे हैं। इसकी मांग भी न होने से प्रदेश सरकार ने एंफोटेरिसिनबी इंजेक्शन की खेप लेने से इनकार कर दिया।
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अब उत्तराखंड में लिपेसोमल एंफोटेरिसीन-बी का उपयोग किया जा रहा है। इसका दुष्प्रभाव नहीं है। डॉक्टर इसे काफी प्रभावी मान रहे हैं। उत्तराखंड में ब्लैक फंगस के 250 से ज्यादा मामले जून के पहले सप्ताह तक ही आ गए थे।


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