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टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना पर जल्द शुरू होगा कार्य

टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में एक अहम प्रगति हुई है। केंद्र सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कार्य प्रारंभ करने से पूर्व राज्य सरकार से औपचारिक सहमति मांगी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस संबंध में मुख्य सचिव को सभी आवश्यक औपचारिकताएं शीघ्र पूर्ण करने और केंद्र को सहमति पत्र भेजने के निर्देश दिए हैं।

यह परियोजना कुमाऊं क्षेत्र के रेल नेटवर्क को सशक्त बनाने की दिशा में गेम चेंजर साबित हो सकती है। लगभग 170 किलोमीटर लंबी इस प्रस्तावित रेल लाइन का फाइनल सर्वे कार्य पूर्ण हो चुका है। अब राज्य सरकार की सहमति के बाद इसका निर्माण कार्य प्रारंभ होने का मार्ग प्रशस्त होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल परिवहन को सुगम बनाएगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ाएगी।’

कर्णप्रयाग रेल लाइन 2026 तक होगी पूर्ण

राज्य में रेल नेटवर्क को पहाड़ी जिलों तक पहुंचाने की दिशा में कार्य तीव्र गति से चल रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है, और यह सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना वर्ष 2026 तक पूरी होने की संभावना है।

टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन के पूरा होने पर यह कर्णप्रयाग-बागेश्वर के माध्यम से गढ़वाल और कुमाऊं को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रेल संपर्क बनेगा। इससे उत्तराखंड के दोनों प्रमुख क्षेत्रों के बीच आवागमन सुलभ होगा।

अन्य रेल परियोजनाएं भी प्रगति पर

प्रदेश सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार ऋषिकेश-उत्तरकाशी और देहरादून-सहारनपुर रेलवे लाइनों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर रही है।

विशेष रूप से 81 किमी लंबी देहरादून-सहारनपुर रेललाइन, जो शाकुंभरी देवी मंदिर मार्ग से होकर गुजरेगी, उसमें 11 किमी लंबी सुरंग भी प्रस्तावित है। यह लाइन हर्रावाला रेलवे स्टेशन तक पहुंचेगी, जिससे देहरादून और पश्चिम उत्तर प्रदेश के बीच सीधा रेल संपर्क स्थापित होगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, ‘केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखंड में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा रहा है। यह राज्य के विकास के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा।’

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