जिले में करीब बारह हजार हेक्टेयर भूमि तो गंगनहर से सिंचित हो रही है, जिससे वहां के छोटे बडे़ किसान मजे में हैं। करीब पंद्रह हजार हेक्टेयर भूमि सरकारी नलकूपों से सिंचित हो रही है। वहां के किसान को खेत सिंचने में बहुत अधिक समस्या नहीं आती, लेकिन जो शेष रकबा निजी ट्यूबवेलों से सिंचित हो रहा है, वहां के किसान पर हर रोज नई आफत बनी रहती है। जिनके पास खुद के ट्यूबवेल हैं उनको भी थोड़ी बहुत राहत है, लेकिन जिनके पास अपने ट्यूबवेल नहीं हैं, उनके लिए गर्मियों में फसल बचाना मुश्किल हो जाता है। दरियापुर के हुक्म सिंह व राजपाल का कहना है कि जिनके पास मात्र पांच छह बीघा भूमि है, वह निजी ट्यूबवेल भी नहीं लगा सकते, इसीलिए किराए पर खेत सींचना मजबूरी है। पूर्व में जो निशुल्क बोरिंग योजना चलती थी, उसमें छोटे किसान के खेत पर बोरिंग हो जाती थी, कुछ किसान साझे में डीजल इंजन खरीद लेते थे, लेकिन अब निशुल्क बोरिंग योजना का लाभ नहीं मिल पाता। हकीमपुर तुर्रा, इमलीखेड़ा, बेडपुर, पुहाना, नन्हेड़ा, इकबालपुर, बिझौली, बेलड़ा, बेलड़ी आदि क्षेत्र के किसान इसीलिए परेशान हैं कि उनके यहां प्रस्तावित सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी नहीं मिल पा रही है। लोकसभा चुनाव में सिंचाई परियोजना का अच्छा खासा मुद्दा बना था।


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