केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कुछ समय पहले संसद में बताया था कि दिसंबर 2023 तक भारतीय नागरिक चीन या नेपाल से गुजरे बिना कैलाश मानसरोवर की यात्रा कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के जरिए एक रास्ता बनाया जा रहा है जो सीधे मानसरोवर को जाएगा। उन्होंने कहा कि इस रास्ते के तैयार होने के बाद न सिर्फ समय की बचत होगी बल्कि मुश्किल रास्ता पहले ही तुलना में बेहद आसान हो जाएगा।
नितिन गडकरी ने संसद में बताया कि इस रास्ते को तैयार करने में मुश्किलें आ रही हैं लेकिन हम -5 डिग्री सेल्सियस में भी फाइटर जेट और हेलिकॉप्टर के जरिए मशीन पहुंचा रहे हैं। इस पूरे रास्ते का 85 फीसद काम पूरा किया जा चुका है तथा दिसंबर 2023 तक इस रास्ते को पूरा कर लिया जाएगा। 
अब जैसे जैसे मौसम अनुकूल हो रहा है चीन सीमा के लिए बन रही मुनस्यारी-धापा-मिलम मोटर मार्ग का निर्माण तेज हो गया है। लगभग 14 किलोमीटर सड़क के कटते ही मिलम रूट से भी चीन सीमा तक पहुंच हो जाएगी। सड़क कटिंग के लिए चिनूक हेलिकॉप्टर से पोकलैंड सहित अन्य उपकरण मिलम पहुंचा दिए गए हैं।
चीन सीमा तक पहुंच के लिए धापा से मिलम के लिए मोटर मार्ग का निर्माण चल रहा है। साल 2008 से निर्माणाधीन यह सड़क धापा से बोगडियार तक 20 किलोमीटर तक कट चुकी है। छह किलोमीटर के हिस्से में डामरीकरण भी किया जा चुका है। मिलम की ओर से बोगडियार के बीच 32 किलोमीटर सड़क मापांग नहरदेवी के बीच काटी जा चुकी है। लगभग 54 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर केवल 14 किलोमीटर सड़क काटा जाना बाकी रह गया है। इसके लिए बीआरओ ने पोकलैंड सहित अन्य मशीनें चिनूक हेलिकॉप्टर से निर्माण स्थल पर पहुंचाईं हैं। बीआरओ ने स्थानीय मजदूरों को भी सड़क कटिंग में लगाया है।
उच्च हिमालयी क्षेत्र में इस समय सड़क बनाने का कार्य चल रहा है। यहां पर आठ महीने कड़ाके की ठंड पड़ती है। इसके अलावा नवंबर से मार्च तक पूरा क्षेत्र बर्फ से ढंक जाता है और इससे सड़क बनाने का कार्य रूक जाता है। जैसे जैसे अब गर्मी शुरू होने लगती है उसके बाद बर्फ पिघलना शुरू हो जाता है और तब फिर से सड़क बनाने का काम तेजी से होने लगता है।
बीआरओ के चीफ इंजीनियर एएस राठौर का कहना है कि मिलम सड़क का काम तेजी से किया जा रहा है। मिलम की ओर मल्ला जोहार में चिनूक हेलिकॉप्टर की मदद से सड़क काटने के लिए मशीनों को पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के कार्य के लिए स्थानीय मजदूरों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। सड़क बनाने का कार्य जल्दी पूरा हो जायेगा, इसके लिए स्थानीय लोगों का भी सहयोग लिया जा रहा है।
जब यह सड़क पूर्ण हो जायेगी तो यहां से कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक पहुंचना आसान हो जायेगा। मानसरोवर झील को इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि लोगों का मानना है कि इस झील में देवी-देवता स्नान करते हैं। हर साल लाखों लोग इस पवित्र जगह पहुंचते हैं। अभी तक नेपाल और चीन के जरिए कैलाश मानसरोवर की यात्रा की जाती है और इसमें 15-20 दिन लगते हैं। यहां सिर्फ स्वस्थ लोग ही यात्रा के लिए आवेदन कर सकते हैं। सिर्फ ऊंचाई ही नहीं भूस्खलन होने के कारण यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील है।


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