उत्तरकाशी में जन्मे जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में रहे जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया। उन्होंने एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व प्रतियोगिताओं में अनेक पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित किया। राष्ट्रमंडल खेलों में उनके नाम 15 पदकों का शानदार रिकॉर्ड दर्ज है, जिसमें 9 स्वर्ण पदक शामिल हैं।
खिलाड़ी के रूप में शानदार करियर के बाद उन्होंने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने कई युवा निशानेबाजों को प्रशिक्षित किया, जिनमें ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर प्रमुख हैं। मनु भाकर की अंतरराष्ट्रीय सफलताओं के पीछे जसपाल राणा की कोचिंग और मार्गदर्शन को महत्वपूर्ण माना जाता है।
उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के कई नेताओं और खिलाड़ियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने इसे भारतीय खेल जगत की अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि जसपाल राणा ने खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में देश की अमूल्य सेवा की।
उत्तराखंड से उनका विशेष लगाव रहा। उन्होंने देहरादून में अपनी शूटिंग अकादमी के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण दिया और राज्य में निशानेबाजी को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई। उनके पिता नारायण सिंह राणा भी खेल और सार्वजनिक जीवन से जुड़े रहे हैं।
जसपाल राणा को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री और द्रोणाचार्य पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए। वर्ष 2025 में उन्हें उत्तराखंड गौरव सम्मान से भी नवाजा गया था।
जसपाल राणा का जाना केवल एक खिलाड़ी का निधन नहीं, बल्कि भारतीय निशानेबाजी के एक युग का अंत है। उनकी उपलब्धियां, उनका अनुशासन और देश के लिए समर्पण आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।




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