सुबह से शुरू हुए धार्मिक कार्यक्रम
कपाट बंद होने के अवसर पर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। मौसम में बदलाव और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के बावजूद आस्था का सिलसिला जारी रहा। श्रद्धालु सुबह तड़के घांघरिया से हेमकुंड साहिब के लिए रवाना हुए। सुबह करीब आठ बजे तक श्रद्धालु पवित्र धाम पहुंच गए, जहां दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां की गई थीं।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10 बजे सुखमणी साहिब के पाठ से हुई। इसके बाद सुबह 11:20 बजे शबद-कीर्तन आयोजित किया गया। दोपहर 12:30 बजे इस वर्ष की यात्रा की अंतिम अरदास की गई। इस दौरान पूरा परिसर ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेककर सुख-समृद्धि की कामना की।
दोपहर एक बजे हुक्मनामा लेने के बाद गुरु ग्रंथ साहिब को पंज प्यारों की अगुआई में दीवान हॉल से सचखंड साहिब में सुशोभित किया गया। इस दौरान सेना के बैंड की मधुर धुनों ने माहौल को भावुक और भक्तिमय बना दिया। इसके बाद दोपहर दो बजे धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
पाकिस्तान से भी पहुंचे श्रद्धालु
गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा के अनुसार, कपाट बंद होने के उत्सव में शामिल होने के लिए पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों और विदेश से भी श्रद्धालु घांघरिया पहुंचे। पाकिस्तान के पेशावर से जत्थेदार पापेंद्र सिंह के नेतृत्व में 40 श्रद्धालुओं का जत्था भी इस विशेष अवसर का साक्षी बना।
ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सरदार सेवा सिंह ने बताया कि पाकिस्तानी श्रद्धालुओं में भी बर्फबारी और धाम के दर्शन को लेकर खासा उत्साह था। विभिन्न स्थानों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया और इस यात्रा के समापन के ऐतिहासिक क्षण को अपने अनुभवों में संजोया।
इस साल 3.80 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
हेमकुंड साहिब के कपाट इस वर्ष 23 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। यात्रा शुरू होने के बाद से ही यहां देश-विदेश से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। इस यात्रा सीजन में करीब 3.80 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र धाम में मत्था टेका। यह संख्या तीर्थस्थल के प्रति बढ़ती आस्था और श्रद्धालुओं के उत्साह को दर्शाती है।
समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब की यात्रा कठिन मानी जाती है। इसके बावजूद हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों से गुजरकर यहां पहुंचते हैं। मौसम की चुनौतियों के बीच भी इस बार यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी देखने को मिली।
कपाट बंद होने के साथ ही इस वर्ष की हेमकुंड साहिब यात्रा का औपचारिक समापन हो गया। अब क्षेत्र में सर्दियों के दौरान बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के कारण तीर्थयात्रा बंद रहेगी। श्रद्धालु अगले यात्रा सीजन में कपाट खुलने का इंतजार करेंगे। शनिवार को आयोजित बंदी उत्सव ने धार्मिक आस्था, परंपरा और श्रद्धालुओं की एकजुटता का यादगार दृश्य प्रस्तुत किया।




Leave a comment