विद्यालयी शिक्षा विभाग के अनुसार, जारी की गई कुल धनराशि में प्राथमिक विद्यालयों के लिए 15 करोड़ रुपये और माध्यमिक विद्यालयों के लिए 15 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसका उद्देश्य आपदा प्रभावित स्कूलों को जल्द सुरक्षित बनाकर विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई का बेहतर माहौल उपलब्ध कराना है।
जिलों को आवंटित किया गया बजट
शिक्षा महानिदेशालय ने सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को आवंटित बजट का शीघ्र उपयोग करने के निर्देश दिए हैं। विद्यालयी शिक्षा महानिदेशक आकांक्षा कोंडे ने इस संबंध में अधिकारियों को पत्र जारी किया है। इसमें निर्माण कार्यों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
इस धनराशि से आपदा में क्षतिग्रस्त विद्यालय भवनों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के साथ चारदीवारी, खेल मैदान, शौचालय तथा अन्य आवश्यक परिसंपत्तियों को भी ठीक किया जाएगा। इससे उन विद्यालयों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी आधारभूत सुविधाएं प्राकृतिक आपदाओं के कारण प्रभावित हुई हैं।
प्राथमिक विद्यालयों के लिए आठ जिलों को सवा-सवा करोड़
प्राथमिक विद्यालयों के लिए चमोली, पिथौरागढ़, चंपावत, उत्तरकाशी, पौड़ी, टिहरी, रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा जिलों को सवा-सवा करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। वहीं, हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर और ऊधमसिंह नगर जिलों को एक-एक करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि दी गई है। माध्यमिक विद्यालयों के लिए भी जिलों में निर्धारित आवंटन के अनुसार बजट उपलब्ध कराया गया है।
विभाग ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को मार्च 2027 तक निर्माण कार्य पूरा करने के साथ खर्च की गई धनराशि का उपयोगिता प्रमाणपत्र शिक्षा महानिदेशालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इससे बजट के इस्तेमाल और कार्यों की प्रगति की निगरानी की जा सकेगी।
सुरक्षित विद्यालय बनाना सरकार की प्राथमिकता
विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से क्षतिग्रस्त विद्यालयों का शीघ्र पुनर्निर्माण कर उन्हें सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं, ताकि विद्यालयों को जल्द पूर्ववत स्वरूप में लाया जा सके।
सरकार का लक्ष्य केवल क्षतिग्रस्त भवनों की मरम्मत करना नहीं, बल्कि विद्यालयों में जरूरी सुविधाओं को बहाल करना भी है। निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य पूरा होने से आपदा प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों को सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।




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