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‘कुटुंब’ देगा महिलाओं को हुनर, उच्च शिक्षा मंत्री ने किया उद्घाटन

हिल मेल ब्यूरो, देहरादून

पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए सरकार के साथ-साथ उत्तराखंड की एक सामाजिक संस्था भी जोर-शोर से काम कर रही है। एनजीओ का नाम है कुटुंब ग्राम समिति। आज 11 जनवरी 2020 को इस एनजीओ की ओर से ग्रामीण महिलाओं के लिए 3 माह के प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने किया।

उच्च शिक्षा मंत्री ने क्या कहा

अपने संबोधन में उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि देश का पहला राज्य हमारा उत्तराखंड है, यहां जितनी भी महिला समूह हैं चाहे वह एनजीओ के माध्यम से, ग्राम समितियों के माध्यम से हों, ग्रामीण विकास के माध्यम से हों… अगर वे सिलाई-बुनाई, गौ पालन, टमाटर-अदरक की खेती, पापड़ और अचार बनाने तक का कोई भी काम करना चाह रही हैं तो राज्य सरकार 5 लाख रुपये प्रति समूह को दे रही है और यह पैसा बिना ब्याज के दिया जा रहा है

उन्होंने बताया कि अबतक एक हजार करोड़ रुपये दिए भी जा चुके हैं। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और उनका सोचना है कि महिलाओं को किसी से पैसे न मांगने पड़े और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। अगर कोई व्यक्तिगत भी लेना चाह रहे हैं तो एक लाख रुपये दिए जा रहे हैं।

गांव-गांव विकसित हो रहा होम स्टे कल्चर

रावत ने बताया कि उत्तराखंड में होम स्टे का कल्चर विकसित किया जा रहा है। जल्द ही इसे शुरू किया जाएगा और इस पर 30 फीसदी सब्सिडी भी दी जा रही है। यह हर गांव के लिए थीम आधारित होगा। सूबे के मंत्री ने बताया कि हमने प्रसाद योजना से केदारनाथ और बद्रीनाथ की महिला समूहों को जोड़ा था। इस बार 80 लाख रुपये का प्रसाद उन्होंने बेचा, जिसमें 42 लाख रुपये का लाभ मिला।

राज्य में सोलर प्लांट के लिए योजना भी शुरू हुई है। राज्य के मूल निवासी अगर 1 मेगावॉट से लेकर 25 मेगावॉट तक देते हैं तो सरकार 25 साल तक बिजली खरीदेगी। उन्होंने कहा कि अगर 100 बल्ब के लिए भी कोई ऊर्जा पैदा करता है तो 30 हजार रुपये महीना कमा सकता है। उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते कहा कि अगर आप चाहें तो कुछ भी कर सकती है, सब संभव है।

 

कोस्टगार्ड के पूर्व DG ने रिटायरमेंट के बाद शुरू की समाज सेवा

आपको बता दें कि तटरक्षक के महानिदेशक राजेंद्र सिंह ने रिटायरमेंट के बाद समाज सेवा को अपना कार्य क्षेत्र चुना है और इसके लिए उन्होंने अपने गृह राज्य को चुना। राज्य से उनका विशेष लगाव रहा है। पद पर रहने के दौरान उन्होंने भर्ती केंद्र खोलने के लिए विशेष प्रयास किए थे, जो सफल रहा। गौरतलब है कि तटरक्षक बल के मुखिया बनने वाले वह बल के पहले अधिकारी हैं क्योंकि इससे पहले तक नौसेना का अधिकारी ही चुना जाता था।

एनजीओ कुटुंब का यह प्रशिक्षण शिविर गेल इंडिया के सौजन्य से प्रस्तावित है, जिसमें ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार परक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके तहत जूट के बैग, पर्स, फोल्डर, पाउच एवं फुटमेट जैसी चीजें बनाना सिखाया जाएगा। इसके अलावा पहाड़ों में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले पारंपरिक रेशे जैसे भीमल एवं राम बांस से प्रयोग में आनेवाले उत्पादों के बारे में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे ग्रामीण अंचल की महिलाएं स्वरोजगार पा सकें और पहाड़ों से पलायन रुक सके। शनिवार को महिलाओं द्वारा तैयार की गई चीजों की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी।

 

शनिवार को कार्यक्रम के दौरान एनजीओ के पदाधिकारी राजेंद्र सिंह, महानिदेशक (सेवानिवृत्त) भारतीय तटरक्षक बल, डीआईजी (रिटायर्ड) मुकेश पोखरियाल, डिप्टी कमांडेंट (रिटायर्ड) वीरेंद्र सिंह रावत, प्रवेश पांथरी और सुश्री वंदना शर्मा समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक सुर में इस पहल की सराहना करते हुए समाज के लिए कार्य करने की इच्छा भी प्रकट की। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम रायपुर में आयोजित किया जा रहा है।

कुटुंब संस्था को जानिए

एनजीओ के संस्थापक राजेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने एक साल पहले कुटुंब ग्राम समिति संस्था को स्थापित किया था। इसका उद्देश्य है उत्तराखंड में रोजगार के लिए संभावनाएं पैदा करना और ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को इस संस्था से जोड़ना। वह कहते हैं कि महिलाएं हमारे समाज की धुरी हैं और जब तक वे सशक्त नहीं होंगी हमारा समाज आगे नहीं बढ़ सकेगा। इससे पलायन भी रुकेगा।

 

उन्होंने बताया कि पहाड़ में जितने भी उत्पाद होते हैं, उनसे रोजगार की काफी संभावनाएं हैं और उसी से हम उत्पाद बना रहे हैं। अब तक इस समिति के साथ 100 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है और कोशिश यह है कि राज्य के हर जिले में प्रशिक्षण शिविर लगाए जाएं, जिससे सुदूर क्षेत्रों की महिलाएं लाभान्वित हो सके। जूलरी, ऑफिस में इस्तेमाल किए जाने वाले फोल्डर जैसी चीजें एनजीओ की ओर से बनाई जा रही हैं। इसका प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मार्केट में ले जाएंगे।

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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