9 दिसंबर 1966 को जन्मे एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। लगभग चार दशक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने संचालन, प्रशिक्षण और रणनीतिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वायुसेना के अभियानों और परिचालन क्षमता को मजबूत करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ का दायित्व संभालने से पहले एयर मार्शल दीक्षित चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू द चेयरमैन, चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CISC) के पद पर कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा वह सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी रह चुके हैं। उन्होंने पश्चिमी सेक्टर में एक अग्रिम पंक्ति के फाइटर एयरबेस और दक्षिणी सेक्टर में एक प्रमुख फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान भी संभाली है।
एयर मार्शल दीक्षित ने नेशनल डिफेंस एकेडमी, डिफेंस स्टाफ सर्विस कॉलेज, बांग्लादेश और नेशनल डिफेंस कॉलेज से प्रशिक्षण एवं शिक्षा प्राप्त की है। उन्हें उड़ान का भी व्यापक अनुभव है। उनके पास विभिन्न प्रकार के विमानों पर 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। उन्होंने मिराज-2000, मिग के विभिन्न संस्करणों, किरण, जगुआर, आईएल-78, हॉक और तेजस जैसे विमानों को उड़ाया है।
वह एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी हैं। अपने सैन्य कार्यकाल के दौरान वह ऑपरेशन सतेज सागर, ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन सिंदूर समेत कई महत्वपूर्ण अभियानों और सैन्य अभ्यासों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं।
उत्कृष्ट एवं विशिष्ट सेवाओं के लिए एयर मार्शल दीक्षित को कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें 2006 में वायु सेना मेडल, 2011 में विशिष्ट सेवा मेडल, 2023 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित के नेतृत्व में भारतीय वायुसेना को परिचालन क्षमता, आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और रणनीतिक तैयारियों के क्षेत्र में नई दिशा मिलने की उम्मीद है। 31 अक्टूबर को वह औपचारिक रूप से देश की वायु शक्ति की कमान संभालेंगे।




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