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महिलाओं के श्रम को सम्मान दिलाने के उद्देश्य से उत्तराखंड कुमांऊ अंचल के कत्यूर घाटी स्थित न्याय पंचायत भिलकोट स्थित अमस्यारी ग्राम पंचायत के टिटोली मैदान में 17 व 18 दिसंबर को हिमालयी पर्यावरण, जलस्त्रों एव पर्वतीय शिक्षा पर कार्यरत संस्था ‘हितैषी’ गरूड, बागेश्वर द्वारा सातवें किर्साण वार्षिक महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। महिलाएं उत्तराखंड की शक्ति हैं, जिनकी बदोलत उत्तराखंड चल रहा है। जो पलायन कर बाहर निकल गए हैं अंचल के उत्थान की जरूर सोचे।
READ MOREबोहेको (BOHECO) ने उत्तराखंड में 0.3ः टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल (टीएचसी) कॉन्टेंट के साथ स्टैंडर्डाइज़्ड इंडस्ट्रियल हेम्प के पहले प्रोटोटाइप की सफलतापूर्वक खेती की।
READ MOREसीएम धामी ने बागेश्वर में बस डिपो का उद्घाटन किया और बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। साथ ही बागेश्वर में विधानसभा में 2198.30 लाख के 19 कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। जिसमें 1463.29 लाख लागत से निर्मित 13 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं 735.01 लाख की धनराशि के 6 विकास कार्यों का शिलान्यास किया।
READ MOREकृष्ण सिंह कुमल्टा ने बताया कि सन् 2013 में मेरे मन में एक विचार आया कि मैं एक बाग बनाऊं तथा उसमें जैविक खेती करूं। उन्होंने क्षेत्र के लोगों को प्रेरणा देने के उद्देश्य से वर्ष 2019 में जिला मुख्यालय से लगभग 80 किमी दूर जिसमें जाने के लिए 4.5 किमी पैदल रास्ता था उन्होंने हिमालय के नजदीकी क्षेत्र खलझूनी नामक स्थान में 120 नाली बंजर भूमि लीज में लेकर 1000 कीवी के पौधे एवं 650 सेब के पौधों का रोपण किया।
READ MOREमुख्यमंत्री ने अपने चार माह के कार्यकाल में पांच सौ से ज्यादा फैसले लिये है तथा हर क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है। राज्य आंदोलनकारियों को चिन्हिकरण के लिए 31 दिसंबर, 2021 तक की तिथि बढायी गयी है तथा आंदोलनकारियों के आश्रितों को भी पेंशन की सुविधा दी जायेगी।
READ MOREपौड़ी के खिर्सू ब्लॉक में भी कोविड वैक्सीन की शतप्रतिशत पहली डोज लगी। सीएम धामी बोले, स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत के विशेष प्रयासों से मिली सफलता। उत्तराखंड में अब तक कोविड-19 टीकाकरण अभियान के अंतर्गत कुल 74,35,124 खुराक दी जा चुकी हैं। जिसमें प्रथम खुराक 56,61,943 (73% ) एवं द्वितीय खुराक 17,73,181 (23%) हैं।
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राजेंद्र कोरंगा की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के पहाड़ों की असली ताकत को दर्शाती है। यह कहानी बताती है कि पहाड़ों को छोड़ने की नहीं, बल्कि उन्हें नई दिशा देने की ज़रूरत है।
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टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में एक अहम प्रगति हुई है। केंद्र सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कार्य प्रारंभ करने से पूर्व राज्य सरकार से औपचारिक सहमति मांगी है।
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