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बीती देर रात करीब 11.15 बजे कुंडा-दानकोट के समीप एक स्कूटी अनियंत्रित होकर सड़क से लगभग 100 मीटर नीचे गहरी खाई में गिर गई। स्कूटी में 3 युवक सवार थे, जिनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे की सूचना आसपास के लोगों ने पुलिस को दी। सूचना पर जिला आपदा प्रबंधन और एसडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू के लिए घटनास्थल पर पहुंची और तीनों युवकों को रेस्क्यू कर स्ट्रेचर के माध्यम से सड़क तक पहुंचाया।
READ MOREप्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल ने जारी आदेश में कहा कि विभागीय चयन समिति की सिफारिश पर इनकी पदोन्नति की गई है।
READ MOREउत्तराखंड में सोनप्रयाग से केदारनाथ 12.9 किलोमीटर लम्बी रोपवे परियोजना के निर्माण पर 4081.28 करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा। रोपवे को सार्वजनिक-निजी भागीदारी में विकसित करने की योजना है और यह परियोजना सबसे उन्नत ट्राई-केबल डिटेचेबल गोंडोला-3एस तकनीक पर आधारित होगा जिसकी डिजाइन क्षमता 1800 यात्री प्रति घंटे प्रति दिशा होगी, जो प्रति दिन 18 हजार यात्रियों को लाने ले जाने में सक्षम होगी। एक गोंडोला मिनी बस के समान होगा जिसमें एक बार में 36 यात्री सवारी कर सकेंगे।
READ MOREबदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब सहित ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश हुई। इससे जिले में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। बदरीनाथ धाम में अधिकतम तापमान माइनस आठ और न्यूनतम तापमान माइनस तीन, ज्योतिर्मठ में अधिकतम तापमान चार और न्यूनतम तापमान माइनस एक, औली में अधिकतम तीन और न्यूनतम माइनस दो रहा।
READ MOREकोटी कनारस में 200 नव गठित वन पंचायतों कान्क्लेव, हनोल मंदिर परिसर में स्थानिकों, पुरोहितों के साथ मन्दिर के मास्टर प्लान, विस्तारीकरण के सम्बन्ध में स्थानिकों के हित एवं सुझाव आदि समुचित विषय पर विमर्श किया जाएगा।
READ MOREउत्तराखंड के लाल अपनी काबिलियत के बल पर उच्च पदों पर विराजमान हैं उनमें से एक नाम भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) पूर्व एडीजी मनोज सिंह रावत का भी है। वह आईटीबीपी से इस रैंक पर प्रोन्नति पाने वाले बल के पहले अधिकारी थे। 1986 बैच के आईटीबीपी कैडर के अधिकारी मनोज सिंह रावत के पास देश, विदेश में फील्ड और प्रशिक्षण का व्यापक अनुभव रहा है।
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उत्तराखंड की नदियाँ अवैध खनन के कारण भीतर से खोखली होती जा रही हैं। नदी तल से छेड़छाड़ ने बाढ़, भूस्खलन और गाँवों की असुरक्षा को बढ़ा दिया है। केदारनाथ से जोशीमठ तक की आपदाएँ चेतावनी हैं कि विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश भविष्य को संकट में डाल रहा है।
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लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा के लिए तीन सितारा रैंक शक्ति नहीं, जिम्मेदारी है। असम राइफल्स के डीजी के रूप में उन्होंने सुरक्षा को मानवीय और भरोसेमंद बनाया। आतंकवाद-रोधी अभियानों में उनका नेतृत्व संतुलन, संवाद और विश्वास पर आधारित रहा, जिसने सैनिकों और नागरिकों दोनों का भरोसा जीता।
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