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उत्तराखंड को दो नामों से जाना जाता है, देवभूमि और वीरभूमि। इस मिट्टी में ऐसे अनेक वीरों ने जन्म लिया है, जिन्होंने अपने अदम्य साहस और वीरता से कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है। 21 अप्रैल को इस वीरभूमि के एक ऐसे ही सपूत की 130वीं जयंती है।
READ MOREउत्तराखंड को हमेशा से वीरों की भूमि कहा जाता है इस भूमि ने देश को अनेक वीर योद्धा दिये हैं जिन्होंने अपने योगदान से देश का नाम रौशन किया है। उनमें से एक नाम कर्नल अजय कोठियाल का भी है। जिन्होंने पहले 29 साल देश की सेवा की और अब उत्तराखंड राज्य की सेवा कर रहे हैं।
READ MOREअसम राइफल्स ने पूर्वोत्तर के सभी राज्यों की टीमों के लिए असम राइफल्स वार्षिक महिला फुटबॉल टूर्नामेंट के दूसरे संस्करण का आयोजन किया। असम राइफल्स के उपनाम ‘पूर्वोत्तर के प्रहरी’ के अनुरूप इसे सेंटिनल्स कप नाम दिया गया।
READ MOREभारत के सबसे पुराने और सबसे प्रतिष्ठित अर्धसैनिक बलों में से एक असम राइफल्स ने 24 मार्च 2025 को शिलांग स्थित अपने मुख्यालय में बड़े गर्व और धूमधाम से अपना 190वां स्थापना दिवस मनाया। यह मील का पत्थर देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए लगभग दो शताब्दियों की समर्पित सेवा, वीरता और अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
READ MOREमेजर बॉब खाथिंग मेमोरियल इवेंट 2025 का पांचवां संस्करण दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में भारत के उत्तर पूर्व के एक महान व्यक्ति मेजर बॉब खाथिंग के जीवन और विरासत को याद किया गया।
READ MOREदेश के प्रथम सीडीएस जनरल बिपिन रावत 67वीं जयंती पर आज जीबीआर मेमोरियल फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा लेक्चर का आयोजन किया गया। जिसमें थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, पूर्व वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया और जनरल बिपिन रावत की सुपुत्री तारिणी रावत समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जनपद के मूल निवासी मेजर जनरल नवीन कुमार थपलियाल ने 1 जून 2026 को भारतीय सशस्त्र बलों के प्रतिष्ठित त्रि-सेवा प्रशिक्षण संस्थान मिलिट्री इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पुणे के कमांडेंट का कार्यभार संभाल लिया।
READ MOREभारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) अकादमी, मसूरी में रविवार को आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड (पीओपी) के साथ 133 युवा अधिकारी औपचारिक रूप से देश की सेवा के लिए आईटीबीपी की मुख्यधारा में शामिल हो गए। इनमें 132 सहायक सेनानी (असिस्टेंट कमांडेंट) और एक महिला उप-सेनानी शामिल हैं। कठिन और चुनौतीपूर्ण प्रशिक्षण पूरा करने के बाद इन युवा अधिकारियों ने राष्ट्र की सीमाओं की सुरक्षा का दायित्व संभालने की दिशा में पहला कदम बढ़ाया।
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