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भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव के बाद केंद्र सरकार देश के रक्षा बेड़े को और मजबूत करने में लगा हुआ है। इसके लिए सरकार द्वारा रक्षा बजट में अतिरिक्त पैसे देने की बात भी सामने आई है। इस बीच भारत अपनी हथियार प्रणाली को भी मजबूत कर रहा है।
READ MOREउत्तराखंड सब एरिया की कमान संभालने के पश्चात् मेजर जनरल गिल ने कहा उनका मुख्य फोकस सैन्य क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के समावेश, ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में योगदान, पूर्व सैनिकों एवं वीर नारियों के कल्याण तथा राज्य प्रशासन के साथ समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करने पर रहेगा।
READ MOREचीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने 25 मई, 2025 को जम्मू एवं कश्मीर के उधमपुर में भारतीय सेना की उत्तरी कमान और हरियाणा के चंडीमंदिर सैन्य स्टेशन में पश्चिमी कमान का दौरा किया।
READ MOREउत्तराखंड सरकार द्वारा चारधाम यात्रा मार्ग और धामों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में बदरीनाथ धाम में भी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। जिसके तहत बदरीनाथ धाम में सिक्स सिग्मा हाई एल्टीट्यूड मेडिकल सेंटर और एसीएलएस (एडवांस क्रिटिकल लाइफ सपोर्ट) एम्बुलेंस का अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश ने उद्घाटन किया।
READ MOREरक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान द्वारा लिखी पुस्तक ‘रेडी, रिलेवेंट एंड रिसर्जेंट: ए ब्लूप्रिंट फॉर द ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ इंडियाज मिलिट्री’ का विमोचन किया।
READ MOREहवलदार मेरिंग एओ का जन्म 15 नवंबर 1920 को हुआ। वह तीसरी बटालियन असम राइफल्स के एक प्रतिष्ठित दिग्गज हैं और बल के इतिहास में सबसे उम्रदराज वीरता पुरस्कार विजेता हैं। उनकी उम्र इस समय 105 साल की है। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध की लड़ाई के अलावा कोहिमा और बर्मा की ऐतिहासिक लड़ाइयों में भाग लिया था।
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उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जनपद के मूल निवासी मेजर जनरल नवीन कुमार थपलियाल ने 1 जून 2026 को भारतीय सशस्त्र बलों के प्रतिष्ठित त्रि-सेवा प्रशिक्षण संस्थान मिलिट्री इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पुणे के कमांडेंट का कार्यभार संभाल लिया।
READ MOREभारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) अकादमी, मसूरी में रविवार को आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड (पीओपी) के साथ 133 युवा अधिकारी औपचारिक रूप से देश की सेवा के लिए आईटीबीपी की मुख्यधारा में शामिल हो गए। इनमें 132 सहायक सेनानी (असिस्टेंट कमांडेंट) और एक महिला उप-सेनानी शामिल हैं। कठिन और चुनौतीपूर्ण प्रशिक्षण पूरा करने के बाद इन युवा अधिकारियों ने राष्ट्र की सीमाओं की सुरक्षा का दायित्व संभालने की दिशा में पहला कदम बढ़ाया।
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