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एयर वाइस मार्शल राजेश भंडारी हाल ही में भारतीय वायुसेना के ‘असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोक्योरमेंट)’ पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। 15 दिसंबर 1990 को भारतीय वायुसेना में कमीशंड अधिकारी के रूप में अपनी सेवा प्रारंभ की थी। उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उनकी यह उपलब्धियां उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है। हिल-मेल के संपादक वाईएस बिष्ट ने एयर वाइस मार्शल राजेश भंडारी से खास बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश –
READ MOREमहानिदेशालय असम राइफल्स ने शिलांग में एक विशेष ‘वेटरन्स सेल’ की स्थापना की है। जो न केवल प्रशासनिक कार्य करते हैं, बल्कि सीधे राज्यों में जाकर पूर्व सैनिकों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनते हैं और आवश्यक मदद पहुंचाते हैं।
READ MOREजब हम भारतीय सेना के शौर्य की बात करते हैं, तो गोरखा सैनिकों का नाम सबसे ऊपर आता है। ‘जय महाकाली, आयो गोरखाली’ के उद्घोष के साथ जब ये रणभूमि में उतरते हैं, तो दुश्मन पीछे हटने को मजबूर हो जाता है। यह बात सीएम योगी आदित्यनाथ ने गोरखा युद्ध स्मारक के शिलान्यास के अवसर पर कही।
READ MOREउत्तराखंड को हम वीरभूमि से जानते हैं और इस भूमि से अनेक वीरों ने जन्म लिया है जिन्होंने अपने देश और प्रदेश का नाम रौशन किया है। उनमें से एक नाम मेजर जनरल अमित नौटियाल का भी है जिन्होंने हाल ही में 5 माउंटेन डिवीजन की कमान संभाली है।
READ MOREरक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को गौतमबुद्ध नगर में रक्षा उपकरण एवं ड्रोन निर्माण इकाई, एयरक्राफ्ट इंजन और डिफेंस एयरोस्पेस टेस्ट फेसिलिटी का लोकार्पण किया।
READ MORE26 अगस्त, 2025 को मध्य प्रदेश के डॉ. अंबेडकर नगर स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित युद्ध, युद्धकला और युद्ध संचालन पर आधारित त्रि-सेवा संगोष्ठी ‘रण संवाद’ में भारत के प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भविष्य के युद्ध, पारंपरिक सीमाओं को नहीं पहचानेंगे, और उनमें जीत सुनिश्चित करने के लिए सभी क्षेत्रों में त्वरित, समन्वित और निर्णायक संयुक्त प्रतिक्रिया अनिवार्य होगी।
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देश के दूसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) रहे जनरल अनिल चौहान ने सेवानिवृत्ति के बाद पहली बार देहरादून का दौरा किया। इस अवसर पर उनका आगमन हिल-मेल के कार्यालय में हुआ, जहां उन्हें विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। इस दौरान हिल-मेल को जनरल चौहान का विस्तृत और विशेष साक्षात्कार करने का अवसर मिला, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, भारतीय सेना की बदलती भूमिका, भविष्य की चुनौतियों, सामरिक रणनीतियों और उनके व्यक्तिगत जीवन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
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मणिपुर के उखरुल जिले में असम राइफल्स के काफिले पर हुए घात लगाकर किए गए हमले में उत्तराखंड के वीर सपूत हवलदार चंद्र मोहन सिंह शहीद हो गए। इस हमले में एक अन्य सैनिक वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह ने भी सर्वोच्च बलिदान दिया। घटना के बाद पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर है और लोग अपने वीर जवान को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
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