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यूपीसीएल ने भारत सरकार की आरडीएसएस योजना के तहत पूरे राज्य में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। यह अत्याधुनिक तकनीक उपभोक्ताओं को रियल-टाइम बिजली खपत की जानकारी, सही बिलिंग, बिजली चोरी में कमी, और निर्बाध आपूर्ति जैसी कई सुविधाएँ प्रदान करेगी।
READ MOREमकर संक्रांति या घुघुतिया प्रसिद्ध हिंदू त्योहारों में से एक है और उत्तराखंड में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार इस दिन सूर्य कर्क राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। यह दिन सूर्य के उत्तरायण (उत्तरायण) होने का प्रतीक है।
READ MOREडॉ मुरली मनोहर जोशी ने ही बीजेपी के लिए राम मंदिर आंदोलन के निहितार्थों को बखूबी समझते हुए पूरी प्लानिंग के साथ इसको जमीन पर उतारा था। बीजेपी की स्थापना के बाद से अटल बिहारी वाजपेयी के पीएम बनने के साथ लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का नाम हमेशा जुड़ता रहा। जोशी को बीजेपी की तीसरी धरोहर भी कहा जाता है। ‘भाजपा की तीन धरोहर अटल-आडवाणी-मुरली मनोहर’।
READ MOREउत्तराखंड के प्रवासी उत्तराखंडी देश—विदेश में रहकर अपनी आजीविका को अच्छी तरह से चला रहे हैं और दूसरा वह जिस गांव में पैदा हुए हैं वह अब अपने गांव के लिए भी कुछ करना चाहते हैं इसके लिए उत्तराखंड सरकार भी आगे आ रही है। ‘गांव को गोद लें’ योजना के तहत इस योजना पर काम किया जा रहा है।
READ MOREअल्मोड़ा के रवि टम्टा ने बांस से ऐसी शानदार छ़डी बनाई है जो वनकर्मियों के बहुत काम आ रही है। इसके अलावा उन्होंने अपने हुनर से पर्यावरण को संरक्षित करने की जरूरत को देखते हुए एक ऐसा यंत्र भी तैयार किया है, जिससे कुछ ही मिनटों में इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज किया जा सकता है और इसमें लागत भी न के बराबर आ रही है।
READ MOREभौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य में दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच आसान बनाने के लिए सरकार राज्य में हवाई सेवाओं के लिए मजबूत बुनियादी सेवाएं जुटा रही है। इसी क्रम में बीते दो साल में राज्य में आठ स्थानों पर हैलीपोर्ट बनकर तैयार हो चुके हैं। जबकि छह अन्य स्थानों पर हेलीपोर्ट का निर्माण प्रगति पर है।
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सांस्कृतिक संस्था पर्वतीय कला केंद्र द्वारा संस्था के संस्थापक तथा रंगमंच जगत के सुप्रसिद्ध संगीतकार स्व. मोहन उप्रेती के 98वें जन्मदिवस पर संस्था की 58 वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित स्मारिका का लोकार्पण तथा उनके द्वारा गीत-नाट्यों और नाटकों का प्रभावशाली एवं मनमोहक मंचन किया गया।
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ऐपण बचपन से उनके जीवन का हिस्सा रहा है। त्योहारों, पूजा-अनुष्ठानों और पारिवारिक आयोजनों में घर की महिलाओं को पारंपरिक लाल गेरू और चावल के घोल से सुंदर आकृतियां बनाते देख उन्होंने इस कला को सीखा। समय के साथ उन्होंने इसे केवल पारंपरिक आंगन और चौकी तक सीमित न रखकर कैनवास, लकड़ी की प्लेट, दीवार सज्जा, उपहार सामग्री और कॉर्पोरेट गिफ्ट आइटम्स तक विस्तार दिया।
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