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उत्तराखंड के प्रवासी उत्तराखंडी देश—विदेश में रहकर अपनी आजीविका को अच्छी तरह से चला रहे हैं और दूसरा वह जिस गांव में पैदा हुए हैं वह अब अपने गांव के लिए भी कुछ करना चाहते हैं इसके लिए उत्तराखंड सरकार भी आगे आ रही है। ‘गांव को गोद लें’ योजना के तहत इस योजना पर काम किया जा रहा है।
READ MOREअल्मोड़ा के रवि टम्टा ने बांस से ऐसी शानदार छ़डी बनाई है जो वनकर्मियों के बहुत काम आ रही है। इसके अलावा उन्होंने अपने हुनर से पर्यावरण को संरक्षित करने की जरूरत को देखते हुए एक ऐसा यंत्र भी तैयार किया है, जिससे कुछ ही मिनटों में इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज किया जा सकता है और इसमें लागत भी न के बराबर आ रही है।
READ MOREभौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य में दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच आसान बनाने के लिए सरकार राज्य में हवाई सेवाओं के लिए मजबूत बुनियादी सेवाएं जुटा रही है। इसी क्रम में बीते दो साल में राज्य में आठ स्थानों पर हैलीपोर्ट बनकर तैयार हो चुके हैं। जबकि छह अन्य स्थानों पर हेलीपोर्ट का निर्माण प्रगति पर है।
READ MOREअल्मोड़ा से हल्द्वानी को जोड़ने वाला एनएच 109 क्वारब के पास लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर है। वहीं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने क्वारब में बंद मार्ग के संबंध में वैकल्पिक मार्ग तलाशने के लिए स्थलीय निरीक्षण किया।
READ MOREसैनिक स्कूल घोड़ाखाल एक बार फिर देश भर के 33 सैनिक स्कूलों के बीच प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) लिखित परीक्षा में शीर्ष प्रदर्शन करने वाला स्कूल बनकर उभरा है।
READ MOREहीरा सिंह राणा उत्तराखंड लोक संगीत के महान संवाहक व रक्षक रहे हैं। उनके रचे गीतों में तरह तरह के भाव, रस, प्रतीक, विम्बों का प्रयोग हुआ। जो उन्हें आधुनिक संगीत संसार में एक महान गीत रचयिता और गायक की श्रेणी में रखने को काफी हैं।
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हल्द्वानी क्षेत्र में जनगणना और बीएलओ ड्यूटी के कारण सरकारी प्राथमिक स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित होती नजर आ रही है। शिक्षकों की कमी पहले से ही एक बड़ी समस्या थी, लेकिन अब अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारियों ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
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उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक और संस्कृतिकर्मी दीवान कनवाल के निधन से पूरे कुमाऊं क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है। लोकगीत रसिकों को अपनी मधुर आवाज से दीवाना बनाने वाले इस कलाकार के जाने से सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है। अल्मोड़ा सहित आसपास के कस्बों और शहरों में उनके प्रशंसकों, कलाकारों और आम लोगों ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
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