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गढ़वाल राइफल्स लैंसडाउन और हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर के सामूहिक प्रयास से विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार एक अभिनव पहल ‘रणभूमि सीमा दर्शन’ के रूप में की गई।
READ MOREचमोली जिले में मत्स्य पालन काश्तकारों की आय का सशक्त साधन बनता जा रहा है। जिले में 1,135 काश्तकार मत्स्य पालन कर अपनी आर्थिकी को मजबूत बना रहे हैं। यहां बड़ी संख्या में ट्राउट मछली का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आमदनी दोनों में वृद्धि हुई है।
READ MOREइस दीपावली धराली के मंदिर में घंटी बजी तो जरूर, पर मन किसी का नहीं झूम उठा। महिलाओं ने पूजा की, पर आरती के बाद आंसू बह निकले। पुरुषों ने पटाखे नहीं फोड़े, बच्चों ने मिठाई नहीं मांगी — क्योंकि सब जानते थे कि इस बार खुशी मनाना किसी के जख्म पर नमक छिड़कने जैसा होगा।
READ MOREचमोली जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध हेमकुंड साहिब और लक्ष्मण मंदिर के कपाट आज (10 अक्टूबर 2025) शीतकाल के लिए विधिपूर्वक बंद कर दिए गए। ये स्थल समुद्रतल से 15,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं, जो न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य के लिहाज से भी विशेष महत्व रखते हैं।
READ MOREउत्तराखंड पर्यटन विभाग द्वारा संचालित दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास (होम स्टे) योजना राज्य में युवाओं के लिए स्वरोजगार का सशक्त माध्यम बनती जा रही है। खासकर चमोली जनपद में, जहां अब तक 169 युवा इस योजना से जुड़कर अपने गांवों में ही होम स्टे का सफल संचालन कर रहे हैं, इससे न केवल रोजगार मिला है, बल्कि पलायन पर भी प्रभावी रोक लगी है।
READ MOREचमोली ज़िले के नंदानगर विकासखंड में बुधवार, 17 सितम्बर 2025 की देर रात बादल फटने (Cloudburst) की दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई, जिससे क्षेत्र में भारी तबाही की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस आपदा में अब तक 12 लोगों के लापता होने की सूचना प्राप्त हुई है। प्रशासन द्वारा दो महिलाओं और एक बच्चे को सुरक्षित मलबे से बाहर निकाला गया है।
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चारधाम यात्रा को लेकर राज्य सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। 22 अप्रैल से केदारनाथ धाम की यात्रा प्रारंभ हो जाएगी। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार घोड़ा-खच्चरों का डिजिटल डाटा तैयार किया जा रहा है, ताकि यात्रा पर आने वाले यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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काण्डा ग्राम पंचायत की शांत वादियों में बसा एक छोटा सा पहाड़ी गांव आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुका है। यह गांव पोखरी विकासखंड के अंतर्गत आता है, जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए भी जाना जाता है। इन्हीं चुनौतियों के बीच कमल रावत और उनकी पत्नी रेखा देवी ने अपने परिश्रम और दृढ़ संकल्प से एक नई कहानी लिखी है।
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