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बेमौसम बर्फबारी से पिघल रहे हिमालय के “वॉटर बैंक”, वैज्ञानिकों ने जताई बड़ी चिंता हिमालय की बर्फ अब अपने तय मौसम में नहीं गिर रही। कभी दिसंबर-जनवरी में सफेद चादर ओढ़ने वाले पहाड़ अब मार्च और अप्रैल में बर्फबारी का सामना कर रहे हैं। यह बदलाव केवल मौसम का उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि हिमालय के भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के ताजा शोध ने खुलासा किया है कि हिमालय में बर्फबारी का पूरा पैटर्न तेजी से बदल रहा है, जिसका सीधा असर ग्लेशियरों, जलस्रोतों, खेती, पर्यटन और लोगों की आजीविका पर पड़ सकता है।
READ MOREउत्तरकाशी के हिमालयी क्षेत्रों में इन दिनों चारधाम यात्रा अपने चरम पर है। श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या अब पर्यावरण के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में पहुंच रहे हजारों छोटे-बड़े वाहनों से निकलने वाला धुआं और गैस उत्सर्जन न केवल वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है, बल्कि इसका असर हिमालयी क्षेत्रों की बर्फबारी, ग्लेशियरों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
READ MOREचमोली जिले के विकासखंड कर्णप्रयाग के सिरपा गांव में दूषित पेयजल ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। गांव में गंदा पानी पीने के कारण 40 से अधिक लोग बुखार और अन्य बीमारियों की चपेट में आ गए हैं। लगातार तीन दिनों से स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंचकर लोगों की जांच और उपचार कर रही है, लेकिन अब तक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
READ MOREबदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार लग रहे जाम ने शुक्रवार को एक गर्भवती महिला के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर दी। एंबुलेंस और वाहन घंटों जाम में फंसे रहे, लेकिन समय रहते स्वास्थ्य विभाग की तत्परता और नर्सों की सूझबूझ से सड़क किनारे ही सुरक्षित प्रसव कराया गया। इस मानवीय प्रयास से जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
READ MOREउत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में वनाग्नि लगातार विकराल रूप लेती जा रही है। बृहस्पतिवार रात से चमोली और रुद्रप्रयाग जनपद के कई जंगल धू-धू कर जलते रहे। कर्णप्रयाग, गैरसैंण और जिलासू क्षेत्र में लगी भीषण आग ने जहां हजारों पेड़ों और वन संपदा को नुकसान पहुंचाया, वहीं कर्णप्रयाग क्षेत्र के चाय बागानों तक आग पहुंचने से करीब ढाई हजार चाय के पौधे जलकर नष्ट हो गए।
READ MOREउत्तराखंड में बढ़ती वनाग्नि अब केवल जंगलों को ही नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगी को भी निगलने लगी है। चमोली और टिहरी जिलों में जंगल की आग बुझाने और उसे आबादी तक पहुंचने से रोकने की कोशिश कर रहे दो लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। चमोली में फायर वाचर राजेंद्र सिंह नेगी और टिहरी में अंजू देवी आग की लपटों में घिर गए और अपनी जान गंवा बैठे। दोनों घटनाओं के बाद वन विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
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उत्तराखंड की प्रतिभाएं आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मेहनत और लगन के दम पर नई पहचान बना रही हैं। इसी कड़ी में पौड़ी गढ़वाल के खण्ड तल्ला (पैठाणी) गांव के होनहार युवा धावक कुलदीप नेगी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पहाड़ की प्रतिभाओं में किसी भी चुनौती का सामना करने की अद्भुत क्षमता होती है। चमोली जनपद के सीमांत और दुर्गम मलारी क्षेत्र में आयोजित प्रतिष्ठित नीति हाफ मैराथन में कुलदीप नेगी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान प्राप्त कर पूरे पौड़ी जिले और उत्तराखंड का नाम रोशन किया है।
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विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी (वैली ऑफ फ्लावर्स) सोमवार से पर्यटकों के लिए खोल दी गई। नए पर्यटन सीजन की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। पहले ही दिन देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे 108 पर्यटकों ने घाटी की अनुपम प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लिया। हिमालय की गोद में बसी यह घाटी एक बार फिर प्रकृति प्रेमियों, ट्रेकर्स, शोधकर्ताओं और फोटोग्राफरों का स्वागत करने के लिए तैयार है।
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