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तिमला एक मौसमी फल होने के कारण कई सारे उद्योगों में इसको सुखा कर लम्बे समय तक प्रयोग किया जाता है। वर्तमान में तिमले का उपयोग सब्जी, जैम, जैली तथा फार्मास्यूटिकल, न्यूट्रास्यूटिकल एवं बेकरी उद्योग में बहुतायत मात्रा में उपयोग किया जाता है।
READ MOREदेहरादून पुलिस मुख्यालय स्थित सभागार में आज समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) के विषय पर एक महत्वपूर्ण वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि व पदाधिकारियों द्वारा प्रतिभाग कर अपने-अपने विचार रखे और विभिन्न विधिक बिन्दुओं पर चर्चा की गयी।
READ MOREमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस बार निकाय चुनाव प्रचार में फ्रंट फुट पर खेलते नजर आए। गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक शायद ही कोई ऐसी जगह हो जहां मुख्यमंत्री धामी नहीं पहुंचे। जहां-जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहुंचे वहां जनता का ऐसा हुजूम उमड़ा की विरोधियों के पसीने छूट गए।
READ MOREदेहरादून के नथुवावाला में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में नगर निगम देहरादून से कांग्रेस के अधिकृत महापौर प्रत्याशी वीरेंद्र पोखरियाल को गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी ने माला पहनाकर और सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया।
READ MOREपीएम नरेंद्र मोदी ने अजीत डोभाल पर भरोसा जताते हुए उन्हें तीसरी बार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया। अजीत डोभाल के तीसरी बार एनएसए बनने से उनके नाम एक कीर्तिमान स्थापित हो गया है। वह भारत के ऐसे पहले व्यक्ति हैं जो लगातार तीसरी बार एनएसए बने हैं।
READ MOREरिंगाल से बने प्रोडक्ट पहाड़ में ही नहीं बल्कि मैदानी क्षेत्रों में भी खूब पसंद किए जा रहे हैं। रिंगाल का पेड़ प्रकृति के लिए भी लाभकारी होता है। जिस जगह पर रिंगाल का पेड़ होता है, वहां भूस्खलन कम होता है। इसके अलावा रिंगाल से बने उत्पादों की बाजार में खूब डिमांड है।
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उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन गतिविधियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। टिहरी जिले के देवप्रयाग क्षेत्र में बंजी जंपिंग करने के कुछ ही समय बाद देहरादून के एक 21 वर्षीय युवक की तबीयत अचानक बिगड़ गई और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच में कार्डियक अरेस्ट अथवा सिंकोप अटैक (अचानक बेहोशी और हृदय संबंधी समस्या) की आशंका जताई है। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया है, वहीं प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की ओर से मामले की जांच की जा रही है।
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उत्तराखंड ही नहीं बल्कि उत्तर भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल एम्स ऋषिकेश में मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या अब संस्थान की क्षमता पर भारी पड़ने लगी है। रोजाना तीन हजार से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं, जबकि अस्पताल की कुल बेड क्षमता एक हजार है। बढ़ती भीड़ और सीमित संसाधनों के कारण मरीजों को उपचार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में पिछले आठ वर्षों से लंबित 200 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित विस्तार योजना एक बार फिर चर्चा में आ गई है। विशेषज्ञों और अस्पताल प्रशासन का मानना है कि यदि जल्द विस्तार नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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