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चारधाम यात्रा और पर्यटन गतिविधियां, महिला स्वयं सहायता समूहों की आर्थिकी का आधार बनते जा रहे हैं। इस वित्तीय वर्ष में अक्टूबर माह तक महिला समूहों ने यात्रा मार्ग और प्रमुख पर्यटन केंद्रों पर खुले यात्रा आउटलेट्स के जरिए कुल 91.75 लाख रूपये की बिक्री करते हुए, 29.7 लाख रूपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है।
READ MOREउत्तराखंड सरकार इकोलॉजी और इकोनॉमी में संतुलन बनाने पर जोर दे रही है। इसके लिए ग्रीन इकोनॉमी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वेस्ट टू एनर्जी मॉडल के तहत शहरों में पैदा होने वाले कूड़े से बिजली और खाद बनने लगी है।
READ MOREजलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इस वजह से ग्लेशियर झीलों का दायरा निरंतर खतरनाक स्थिति की तरफ बढ़ रहा है। हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों में 13 साल के अंतराल में 33.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
READ MOREपन्तनगर कृषि विश्वविद्यालय 65वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित किये जायेंगे शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम।
READ MOREउत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर माताश्री मंगला, पद्मश्री प्रीतम भरतवाण, हेमंत पांडेय और डॉ. महेश कुड़ियाल को मिला उत्तराखंड गौरव सम्मान।
READ MOREउत्तराखण्ड फ़िल्म नीति 2024 के अंतर्गत क्षेत्रीय भाषा की फिल्मों के प्रोडक्शन में किए गए व्यय का 50 प्रतिशत तक या अधिकतम 2 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की जाएगी, वहीं हिंदी और अन्य 8वीं अनुसूची की भाषाओं के लिए यह अनुदान 30 प्रतिशत या अधिकतम 3 करोड़ रुपये तक का होगा।
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उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन गतिविधियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। टिहरी जिले के देवप्रयाग क्षेत्र में बंजी जंपिंग करने के कुछ ही समय बाद देहरादून के एक 21 वर्षीय युवक की तबीयत अचानक बिगड़ गई और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच में कार्डियक अरेस्ट अथवा सिंकोप अटैक (अचानक बेहोशी और हृदय संबंधी समस्या) की आशंका जताई है। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया है, वहीं प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की ओर से मामले की जांच की जा रही है।
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उत्तराखंड ही नहीं बल्कि उत्तर भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल एम्स ऋषिकेश में मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या अब संस्थान की क्षमता पर भारी पड़ने लगी है। रोजाना तीन हजार से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं, जबकि अस्पताल की कुल बेड क्षमता एक हजार है। बढ़ती भीड़ और सीमित संसाधनों के कारण मरीजों को उपचार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में पिछले आठ वर्षों से लंबित 200 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित विस्तार योजना एक बार फिर चर्चा में आ गई है। विशेषज्ञों और अस्पताल प्रशासन का मानना है कि यदि जल्द विस्तार नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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