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उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। इसलिए युवाओं को पैराग्लाइडिंग, वाईट वाटर राफ्टिंग, माउंटेनियरिंग जैसे साहसिक खेलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिससे कि वह आगे चलकर इस क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे और उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
READ MOREरक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित 75 प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का लोकार्पण कर राष्ट्र को समर्पित किया। इसमें 09 परियोजनाएं उत्तराखंड की शामिल हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी वर्चुअल रूप से उपस्थित थे।
READ MOREउत्तराखंड में पिछले कई दिनों से ठप पड़ी ई-ऑफिस व्यवस्था अब सुचारू होने लगी है। करोड़ों रुपए खर्च कर राज्य में तैयार किया गया आईटी सिस्टम फिर पटरी पर उतरने लगा है। हालांकि, ऐसा राज्य का सूचना प्रौद्योगिकी विभाग एक या दो दिन नहीं बल्कि करीब चार दिनों बाद कर पाया है।
READ MOREजौलीग्रांट से अल्मोड़ा के बीच हेलिकॉप्टर सेवा शुरू होने के बाद अब यमुनोत्री, गौचर, जोशियाड़ा के लिए जल्द हवाई सेवा शुरू की जाएगी। इसकी घोषणा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की।
READ MOREसाइबर हमले के बाद उत्तराखंड के सचिवालय समेत सभी सरकारी दफ्तरों में कंप्यूटर पर सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा जो कार्यालय अभी तक सुरक्षित स्वान नेटवर्क से नहीं जुड़े हैं, उन्हें तेजी से जोड़ा जा रहा है।
READ MOREउत्तराखंड में 38वें नेशनल गेम्स अगले वर्ष 28 जनवरी से 14 फरवरी तक आयोजित होंगे। यही नहीं ओलंपिक संघ अध्यक्ष ने विंटर नेशनल गेम्स भी उत्तराखंड में आयोजित करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने पी टी ऊषा के अनुरोध को सहर्ष स्वीकार करते हुए कहा कि उत्तराखंड इसके लिए भी तैयार है।
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उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन गतिविधियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। टिहरी जिले के देवप्रयाग क्षेत्र में बंजी जंपिंग करने के कुछ ही समय बाद देहरादून के एक 21 वर्षीय युवक की तबीयत अचानक बिगड़ गई और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच में कार्डियक अरेस्ट अथवा सिंकोप अटैक (अचानक बेहोशी और हृदय संबंधी समस्या) की आशंका जताई है। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया है, वहीं प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की ओर से मामले की जांच की जा रही है।
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उत्तराखंड ही नहीं बल्कि उत्तर भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल एम्स ऋषिकेश में मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या अब संस्थान की क्षमता पर भारी पड़ने लगी है। रोजाना तीन हजार से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं, जबकि अस्पताल की कुल बेड क्षमता एक हजार है। बढ़ती भीड़ और सीमित संसाधनों के कारण मरीजों को उपचार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में पिछले आठ वर्षों से लंबित 200 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित विस्तार योजना एक बार फिर चर्चा में आ गई है। विशेषज्ञों और अस्पताल प्रशासन का मानना है कि यदि जल्द विस्तार नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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