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लक्खीबाग क्षेत्र में कल एक बच्ची के बह जाने की खबर मिली थी इसके बाद इसके लिए रेस्क्यू अभियान चलाया गया।
READ MOREगौरीकुंड के पास एक वाहन के दुर्घटना होने की खबर है। प्रारम्भिक सूचना के अनुसार इस वाहन में 14 लोग सवार थे जिसमें से 13 को रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचा दिया गया है। जबकि एक की तलाश अभी जारी है।
READ MOREउत्तराखंडी लोकगीत-नृत्य महज मनोरंजन का ही जरिया नहीं हैं, बल्कि वह लोकजीवन के अच्छे-बुरे अनुभवों से सीख लेने की प्रेरणा भी देते हैं। हालांकि, समय के साथ बहुत से लोकगीत-नृत्य विलुप्त हो गए, लेकिन बचे हुए लोकगीत-नृत्यों की भी अपनी विशिष्ट पहचान है।
READ MOREदेश में आजकल मिलावटी घी पर खूब चर्चा हो रही है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार ने भी मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है और इसके लिए जगह जगह पर छापेमारी की जा रही है।
READ MOREउत्तराखंड के कुशल शिल्पकारों ने अयोध्या में भगवान राम के लिए वस्त्र तैयार किया है। मुख्यमंत्री ने इसे अयोध्या पहुंचाकर श्रीराम मंदिर में भेंट किया। यह शुभवस्त्रम् में न केवल प्रदेश की ऐपण कला नजर आती है बल्कि इसमें निहित भक्ति और श्रम साधकों की अद्वितीय शिल्पकला का अद्भुत समन्वय भी है।
READ MORE‘डियर लतिका’ को ऑस्ट्रेलियन फिल्म ‘लिंबो’ के साथ सर्वश्रेष्ठ फिल्म का खिताब भी मिला। इसके अलावा फिल्म को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की श्रेणी में नामांकित किया गया था। मनीष डिमरी और पल्वी जसवाल ने मुख्य भूमिकाएं निभाई, जबकि रजत सुखीजा, नरेंद्र सिंह बिष्ट, मदन मेहरा और गोपा नयाल ने भी अहम किरदार निभाए। ‘डियर लतिका’ उत्तराखंड के परिवेश में बनी फिल्म है, जिसका फिल्मांकन अल्मोड़ा और नैनीताल के क्षेत्रों में किया गया है।
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उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन गतिविधियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। टिहरी जिले के देवप्रयाग क्षेत्र में बंजी जंपिंग करने के कुछ ही समय बाद देहरादून के एक 21 वर्षीय युवक की तबीयत अचानक बिगड़ गई और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच में कार्डियक अरेस्ट अथवा सिंकोप अटैक (अचानक बेहोशी और हृदय संबंधी समस्या) की आशंका जताई है। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया है, वहीं प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की ओर से मामले की जांच की जा रही है।
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उत्तराखंड ही नहीं बल्कि उत्तर भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल एम्स ऋषिकेश में मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या अब संस्थान की क्षमता पर भारी पड़ने लगी है। रोजाना तीन हजार से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं, जबकि अस्पताल की कुल बेड क्षमता एक हजार है। बढ़ती भीड़ और सीमित संसाधनों के कारण मरीजों को उपचार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में पिछले आठ वर्षों से लंबित 200 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित विस्तार योजना एक बार फिर चर्चा में आ गई है। विशेषज्ञों और अस्पताल प्रशासन का मानना है कि यदि जल्द विस्तार नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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