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उत्तराखंड के एक दूरस्थ गांव में सड़क निर्माण की स्वीकृति के बावजूद आज तक सड़क नहीं बन पाई। नतीजा यह है कि बीमार मरीजों को पांच किलोमीटर तक कंधों पर उठाकर अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। यह घटना पहाड़ी इलाकों में विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है।
READ MOREउत्तराखंड सरकार ने पीआरडी जवानों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब सामान्य ड्यूटी में मृत्यु पर मुआवज़ा 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख किया गया है, जबकि अत्यंत संवेदनशील ड्यूटी में मृत्यु होने पर 75 हजार की जगह 1.50 लाख रुपए दिए जाएंगे। CM धामी ने स्थापना दिवस समारोह में इसकी घोषणा की।
READ MOREउत्तराखंड में राशनकार्ड धारकों के लिए बड़ी राहत—अब 54 लाख लोग मोबाइल ऐप से घर बैठे ई-केवाईसी कर सकेंगे। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने नई तकनीक शुरू की है, जिससे राशन डीलर की दुकानों पर लगने वाली भारी भीड़ खत्म होगी और आइरिस स्कैन से पहचान तुरंत संभव हो जाएगी।
READ MOREरामनगर के कोसी और दाबका नदी क्षेत्र में भूकंप से बड़ा भू-परिवर्तन संभव है। वैज्ञानिकों का मानना है कि किसी भी बड़े भूकंप की स्थिति में दाबका नदी का बहाव बदलकर कोसी से मिल सकता है। आईआईटी कानपुर और वैज्ञानिकों की नई स्टडी में फॉल्ट लाइन पर बड़े निर्माण को गंभीर खतरा बताया गया है।
READ MOREप्रदेश में राशन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया नए साल से पूरी तरह ऑनलाइन होने जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि आवेदन से लेकर पात्रता जांच, सत्यापन, वितरण और राशन विक्रेताओं के भुगतान तक हर चरण डिजिटल हो। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों को विभागीय कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
READ MOREभगवान श्रीकृष्ण द्वारा गीता में कहा गया—“मैं नागों में अनंत हूं”—और इसी दिव्य स्वरूप की पूजा उत्तराखंड में हजारों वर्षों से होती आ रही है। द्वापर युग से जुड़े सेम मुखेम के नागराजा मंदिर को देवभूमि का “पांचवां धाम” माना जाता है। कालिया नाग की कथा, नागवंश का इतिहास और नागराजा की डोली परंपरा आज भी इस भूमि की आस्था और संस्कृति की पहचान है।
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प्रिया सिंह चौहान ने हासिल की 45वीं रैंक, मीनल नेगी 66वीं और अनुज पंत 69वीं रैंक के साथ प्रदेश का बढ़ाया मान
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उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों से उठी न्याय की एक आवाज अब देश की राजधानी तक पहुंचने की राह पर है। एक ओर जहां देश के जवान सीमाओं पर तैनात होकर राष्ट्र की सुरक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके परिवार के लोग अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
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