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बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया है। शीतकाल में धाम की सुरक्षा संभालने वाली आईटीबीपी ने अब यह जिम्मेदारी इंडियन रिजर्व बटालियन (आईआरबी) को सौंप दी है। आईआरबी ने कठिन मौसम में भी सुरक्षा सुनिश्चित की और अब यात्रा सीजन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी आईआरबी निभाएगी।
READ MOREमद्महेश्वर धाम के प्रधान पुजारी शिवलिंग ने पंचांग पूजन के तहत अनेक पूजाएं संपन्न कर भगवान मदमहेश्वर समेत तैंतीस कोटी देवी-देवताओं का आह्वान किया। जिसके तहत सुबह 5 बजे भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली का भव्य श्रृंगार कर आरती उतारी गई। फिर भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली गौंडार गांव से कैलाश के लिए रवाना हुई।
READ MOREकॉर्बेट टाइगर रिज़र्व के कालागढ़ रेंज के घने जंगलों में एक नर बाघ ने बाघिन के दो मासूम शावकों को मौत के घाट उतार दिया। गश्त के दौरान वन विभाग की टीम को दोनों शावकों के क्षत-विक्षत शव जंगल के मैग्ज़ीन स्रोत क्षेत्र से बरामद हुए।
READ MOREजमीनी विवाद के चलते ताई की हत्या व ताऊ को गम्भीर रूप से घायल करने के आरोपी को पुलिस ने मात्र कुछ घंटो में ही गिरफ्तार कर लिया है। जिसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
READ MOREवर्ष 2024 के लोक सभा चुनाव में ही 1 लाख करोड़ रुपए व्यय हुए। यदि चुनाव एक साथ कराए जाएंगे तो व्यय में 12000 करोड़ रुपये की बचत होती और जी डी पी में 1.5 प्रतिशत की वृद्धि होती। बार-बार चुनाव कराने से सुरक्षा बल, सरकारी अधिकारी, स्कूल भवन, वाहन, इत्यादि की बार-बार आवश्यकता होती है। एक साथ चुनाव से इन संसाधनों की बचत होगी।
READ MOREमुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन सालों में राज्य में विधानसभा, लोकसभा और निकाय चुनावों की आचार संहिता के कारण 175 दिन तक राज्य की प्रशासनिक मशीनरी नीतिगत निर्णय लेने की प्रक्रिया से वंचित रही। छोटे और सीमित संसाधनों वाले राज्य के लिए ये 175 दिन
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गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान की अध्यक्षता में 119वें अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी के आयोजन से पूर्व आज कुलपति सभागार में प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधियों के साथ पत्रकार वार्ता आयोजित की गई।
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उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक और संस्कृतिकर्मी दीवान कनवाल के निधन से पूरे कुमाऊं क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है। लोकगीत रसिकों को अपनी मधुर आवाज से दीवाना बनाने वाले इस कलाकार के जाने से सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है। अल्मोड़ा सहित आसपास के कस्बों और शहरों में उनके प्रशंसकों, कलाकारों और आम लोगों ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
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