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उत्तराखंड में मॉनसून की दस्तक के साथ ही कुदरत का कहर शुरू हो गया है। भारतीय मौसम विभाग ने प्रदेश के 9 जिलों देहरादून, नैनीताल, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चंपावत और उधम सिंह नगर के लिए आज भी भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। अन्य जिलों में भी गरज-चमक और तीव्र वर्षा की संभावना जताई गई है।
READ MORE‘अपना घर’ बाल एवं महिला उत्थान समिति, बद्रीपुर, देहरादून — वार्षिकोत्सव एवं सम्मान समारोह
READ MOREस्वैच्छिक रक्तदान शिविर में एकत्र हुए 83 यूनिट रक्त। चिंतन फाउंडेशन का सराहनीय प्रयास
READ MOREरुद्रप्रयाग। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता विजय पाल कैंतुरा ने जानकारी देते हुए बताया कि रविवार सुबह 8 बजे अलकनंदा नदी का जलस्तर 534.40 मीटर दर्ज किया गया, जो कि खतरे के निशान से लगभग दो मीटर नीचे है। उन्होंने कहा कि ऊपरी इलाकों में बारिश जारी है। जिसके कारण श्रीनगर जलविद्युत परियोजना से भी अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है।
READ MOREऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के शेष जनपद में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है। राज्य के सभी जनपदों में आकाशीय बिजली चमकने के साथ तेज बारिश हो सकती है। जिसके लिए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। बात राजधानी देहरादून की करें तो यहां आमतौर पर बादल छाए रहेंगे। भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान क्रमशः 30 डिग्री सेल्सियस व 22 डिग्री सेल्सियस के लगभग रहने का अंदेशा है।
READ MOREउत्तरकाशी दुबाटा बैंड पर तैनात एसआई विक्रम सिंह ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से श्रद्धालुओं को क्षेत्र की स्थिति से अवगत करवाते हुए गंगोत्री की ओर भेजा जा रहा है। इधर यमुनोत्री धाम की ओर जानकीचट्टी, फूलचट्टी खरसाली, राना चट्टी, स्याना चट्टी क्षेत्र में करीब एक हजार से अधिक श्रद्धालु फंसे हुए हैं। चौकी प्रभारी भूपेंद्र सिंह रावत ने बताया कि जानकीचट्टी यमुनोत्री पैदल मार्ग पर सामान्य स्थिति के चलते यहां पर कल से ठहरे हुए श्रद्धालुओं को यमुनोत्री धाम जाने दिया जा रहा है।
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विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम की पवित्रता और हिमालयी पर्यावरण की रक्षा के लिए चलाया जा रहा ‘कैरी मी बैक’ अभियान लगातार सफलता की नई कहानी लिख रहा है। जिला प्रशासन, स्थानीय निकायों और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयास से संचालित इस अनूठी पहल के तहत अब तक करीब दो टन कचरा केदारनाथ धाम से नीचे गौरीकुंड तक लाया जा चुका है। अभियान को श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों का व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिससे केदारनाथ यात्रा मार्ग पर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का सकारात्मक माहौल बन रहा है।
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उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक आंदोलनों और ऐतिहासिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय ने अपने पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। आगामी जुलाई से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले देशभर के विद्यार्थियों को उत्तराखंड के प्रमुख समाज सुधारक और आंदोलनकारी स्वामी मन्मथन के जीवन, विचारों और योगदान का अध्ययन कराया जाएगा।
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