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ऐसी मान्यता है कि मां गंगा जी लगभग 32 दिनों तक शिव जी की जटाओं में विचरण करती रहीं, बहती रही, घूमती रही है और फिर, ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को भगवान शिव ने अपनी एक जटा खोली और गंगा मां धरती पर अवतरित हुईं।
READ MOREउत्तरकाशी के विश्वप्रसिद्ध कालिंदी पास ट्रेक पर इस बार प्रशासनिक नियमों का ऐसा असर पड़ा है कि साहसिक पर्यटन कारोबार ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। नेपाली मूल के पोटर्स से पासपोर्ट और वीजा अनिवार्य किए जाने के फैसले के बाद ट्रेकिंग एजेंसियों, गाइडों और स्थानीय कारोबारियों में भारी नाराजगी है। गढ़वाल हिमालय ट्रैकिंग एवं माउंटेनियरिंग संगठन ने प्रशासन से नियमों में तत्काल शिथिलता लाने की मांग करते हुए जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी भटवाड़ी को ज्ञापन सौंपा है।
READ MOREउत्तराखंड में बंद और सील की जा चुकी फैक्ट्रियों में नकली व अवैध दवाओं के निर्माण के लगातार सामने आ रहे मामलों ने प्रशासनिक निगरानी और विभागीय समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर में बीते एक वर्ष के दौरान सात ऐसे मामले पकड़े गए हैं, जहां फैक्ट्रियां आधिकारिक तौर पर बंद थीं, लेकिन भीतर चोरी-छिपे दवाओं का उत्पादन जारी था। इससे साफ है कि नियमित निगरानी और कड़े एक्शन के अभाव में अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं।
READ MOREउत्तराखंड की वीरभूमि ने अनेक ऐसे सपूतों को जन्म दिया, जिन्होंने अपने साहस, त्याग और संघर्ष से इतिहास के पन्नों पर अमिट छाप छोड़ी। इन्हीं महान विभूतियों में एक नाम अमर शहीद श्रीदेव सुमन का है। उनकी जयंती केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष, जनअधिकारों की रक्षा और लोकतंत्र के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान को याद करने का अवसर है।
READ MOREबेमौसम बर्फबारी से पिघल रहे हिमालय के “वॉटर बैंक”, वैज्ञानिकों ने जताई बड़ी चिंता हिमालय की बर्फ अब अपने तय मौसम में नहीं गिर रही। कभी दिसंबर-जनवरी में सफेद चादर ओढ़ने वाले पहाड़ अब मार्च और अप्रैल में बर्फबारी का सामना कर रहे हैं। यह बदलाव केवल मौसम का उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि हिमालय के भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के ताजा शोध ने खुलासा किया है कि हिमालय में बर्फबारी का पूरा पैटर्न तेजी से बदल रहा है, जिसका सीधा असर ग्लेशियरों, जलस्रोतों, खेती, पर्यटन और लोगों की आजीविका पर पड़ सकता है।
READ MOREउत्तरकाशी के हिमालयी क्षेत्रों में इन दिनों चारधाम यात्रा अपने चरम पर है। श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या अब पर्यावरण के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में पहुंच रहे हजारों छोटे-बड़े वाहनों से निकलने वाला धुआं और गैस उत्सर्जन न केवल वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है, बल्कि इसका असर हिमालयी क्षेत्रों की बर्फबारी, ग्लेशियरों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
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उत्तराखंड के प्रसिद्ध तुंगनाथ ट्रैक मार्ग पर रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। देवरियाताल से चोपता-बनियाकुंड होते हुए तुंगनाथ की ओर ट्रैकिंग के दौरान रास्ता भटक गए पांच पर्यटकों को जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, डीडीआरएफ और स्थानीय लोगों के संयुक्त प्रयास से सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। सभी पर्यटक सकुशल हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति सामान्य बताई गई है।
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उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की बहुप्रतीक्षित स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा रविवार को प्रदेशभर में शांतिपूर्ण और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच संपन्न हुई। 13 जिलों के 449 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित इस परीक्षा में 83 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने भाग लिया। परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पहली बार अत्याधुनिक तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया गया। केंद्रों पर एआई आधारित कैमरे, सीसीटीवी और जैमर लगाए गए थे, जिनकी मदद से आयोग के कंट्रोल रूम से पूरे परीक्षा संचालन की लाइव निगरानी की गई।
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