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चमोली जिले के विकासखंड कर्णप्रयाग के सिरपा गांव में दूषित पेयजल ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। गांव में गंदा पानी पीने के कारण 40 से अधिक लोग बुखार और अन्य बीमारियों की चपेट में आ गए हैं। लगातार तीन दिनों से स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंचकर लोगों की जांच और उपचार कर रही है, लेकिन अब तक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
READ MOREबदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार लग रहे जाम ने शुक्रवार को एक गर्भवती महिला के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर दी। एंबुलेंस और वाहन घंटों जाम में फंसे रहे, लेकिन समय रहते स्वास्थ्य विभाग की तत्परता और नर्सों की सूझबूझ से सड़क किनारे ही सुरक्षित प्रसव कराया गया। इस मानवीय प्रयास से जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
READ MOREउत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में वनाग्नि लगातार विकराल रूप लेती जा रही है। बृहस्पतिवार रात से चमोली और रुद्रप्रयाग जनपद के कई जंगल धू-धू कर जलते रहे। कर्णप्रयाग, गैरसैंण और जिलासू क्षेत्र में लगी भीषण आग ने जहां हजारों पेड़ों और वन संपदा को नुकसान पहुंचाया, वहीं कर्णप्रयाग क्षेत्र के चाय बागानों तक आग पहुंचने से करीब ढाई हजार चाय के पौधे जलकर नष्ट हो गए।
READ MOREदिल्ली-एनसीआर में बसे प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए अपनी मातृभाषा और लोकसंस्कृति को जीवित रखने का एक अनूठा अभियान पिछले 15 वर्षों से लगातार चल रहा है। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के तत्वावधान में गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी भाषाओं की ग्रीष्मकालीन शिक्षण कक्षाएं हर वर्ष आयोजित की जाती हैं। वर्ष 2012 से शुरू हुई यह पहल आज एक विशाल सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले चुकी है।
READ MOREउत्तराखंड के पहाड़ों में जैसे ही गर्मियों की धूप तेज होने लगती है और जंगलों में लाल-लाल रसीले काफल पकने लगते हैं, वैसे ही वादियों में एक मधुर आवाज गूंजने लगती है। “काफल पाको… मैं नि चाख्यो…”यह केवल एक पक्षी की आवाज नहीं, बल्कि पहाड़ की लोकसंस्कृति, प्रकृति और भावनाओं से जुड़ी एक जीवंत धुन है। पहाड़ के लोग मानते हैं कि यह चिड़िया स्वयं आकर लोगों को बताती है कि अब जंगलों में काफल पक चुके हैं। इसलिए इसे प्यार से “काफल-पाको चिड़िया” कहा जाता है। वैज्ञानिक भाषा में इसे इंडियन कुक्कू कहा जाता है, जिसका वैज्ञानिक नाम कुकुलस माइक्रोप्रोटेरस है।
READ MOREहिमालय की ऊंचाइयों पर जब सैकड़ों धावक बर्फीली चोटियों और गहरी घाटियों के बीच दौड़ेंगे, तब यह केवल एक प्रतियोगिता नहीं होगी- यह सीमांत भारत के आत्मविश्वास, प्रकृति के वैभव और उत्तराखंड की असीम संभावनाओं का जीवंत उत्सव होगा।
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उत्तराखंड के प्रसिद्ध तुंगनाथ ट्रैक मार्ग पर रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। देवरियाताल से चोपता-बनियाकुंड होते हुए तुंगनाथ की ओर ट्रैकिंग के दौरान रास्ता भटक गए पांच पर्यटकों को जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, डीडीआरएफ और स्थानीय लोगों के संयुक्त प्रयास से सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। सभी पर्यटक सकुशल हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति सामान्य बताई गई है।
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उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की बहुप्रतीक्षित स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा रविवार को प्रदेशभर में शांतिपूर्ण और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच संपन्न हुई। 13 जिलों के 449 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित इस परीक्षा में 83 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने भाग लिया। परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पहली बार अत्याधुनिक तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया गया। केंद्रों पर एआई आधारित कैमरे, सीसीटीवी और जैमर लगाए गए थे, जिनकी मदद से आयोग के कंट्रोल रूम से पूरे परीक्षा संचालन की लाइव निगरानी की गई।
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