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दिल्ली-एनसीआर में बसे प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए अपनी मातृभाषा और लोकसंस्कृति को जीवित रखने का एक अनूठा अभियान पिछले 15 वर्षों से लगातार चल रहा है। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के तत्वावधान में गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी भाषाओं की ग्रीष्मकालीन शिक्षण कक्षाएं हर वर्ष आयोजित की जाती हैं। वर्ष 2012 से शुरू हुई यह पहल आज एक विशाल सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले चुकी है।
READ MOREउत्तराखंड के पहाड़ों में जैसे ही गर्मियों की धूप तेज होने लगती है और जंगलों में लाल-लाल रसीले काफल पकने लगते हैं, वैसे ही वादियों में एक मधुर आवाज गूंजने लगती है। “काफल पाको… मैं नि चाख्यो…”यह केवल एक पक्षी की आवाज नहीं, बल्कि पहाड़ की लोकसंस्कृति, प्रकृति और भावनाओं से जुड़ी एक जीवंत धुन है। पहाड़ के लोग मानते हैं कि यह चिड़िया स्वयं आकर लोगों को बताती है कि अब जंगलों में काफल पक चुके हैं। इसलिए इसे प्यार से “काफल-पाको चिड़िया” कहा जाता है। वैज्ञानिक भाषा में इसे इंडियन कुक्कू कहा जाता है, जिसका वैज्ञानिक नाम कुकुलस माइक्रोप्रोटेरस है।
READ MOREहिमालय की ऊंचाइयों पर जब सैकड़ों धावक बर्फीली चोटियों और गहरी घाटियों के बीच दौड़ेंगे, तब यह केवल एक प्रतियोगिता नहीं होगी- यह सीमांत भारत के आत्मविश्वास, प्रकृति के वैभव और उत्तराखंड की असीम संभावनाओं का जीवंत उत्सव होगा।
READ MOREजिसे वन्यजीवों और जैव विविधता का समृद्ध प्रदेश माना जाता है, वहीं अब बाघ और तेंदुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्य के जंगलों में बीते तीन वर्षों के दौरान 345 बाघ और तेंदुओं की मौत ने वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण तंत्र की कार्यप्रणाली पर चिंता बढ़ा दी है। अवैध शिकार, सड़क और रेल दुर्घटनाएं, आपसी संघर्ष तथा प्राकृतिक कारणों के साथ-साथ वन्यजीव अंगों की तस्करी भी इन मौतों का बड़ा कारण बन रही है।
READ MOREपंच केदारों में द्वितीय केदार के रूप में प्रसिद्ध भगवान मद्महेश्वर मंदिर के कपाट बृहस्पतिवार को वैदिक मंत्रोच्चारण, धार्मिक अनुष्ठानों और “हर-हर महादेव” के गगनभेदी जयकारों के बीच श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाटोद्घाटन के इस पावन अवसर का साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु धाम पहुंचे। करीब 1135 श्रद्धालुओं ने भगवान मद्महेश्वर के प्रथम दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।
READ MOREउत्तराखंड में बढ़ती वनाग्नि अब केवल जंगलों को ही नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगी को भी निगलने लगी है। चमोली और टिहरी जिलों में जंगल की आग बुझाने और उसे आबादी तक पहुंचने से रोकने की कोशिश कर रहे दो लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। चमोली में फायर वाचर राजेंद्र सिंह नेगी और टिहरी में अंजू देवी आग की लपटों में घिर गए और अपनी जान गंवा बैठे। दोनों घटनाओं के बाद वन विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
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महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय 15वीं उत्तराखंड स्टेट वुशू चैंपियनशिप का भव्य समापन हो गया। प्रतियोगिता में प्रदेशभर से आए लगभग 300 खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा और खेल कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। कड़े मुकाबलों के बीच देहरादून जिले की टीम ने सर्वाधिक 33 स्वर्ण पदक जीतकर ओवरऑल चैंपियनशिप अपने नाम की। वहीं, नैनीताल ने 30 पदकों के साथ उपविजेता बनने का गौरव हासिल किया, जबकि पौड़ी की टीम चार स्वर्ण पदकों के साथ द्वितीय उपविजेता रही।
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भारत के अंतिम गांव माणा में स्थित क्षेत्र रक्षक भगवान घंटाकर्ण मंदिर के कपाट सोमवार को वैदिक मंत्रोच्चारण और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाटोद्घाटन के अवसर पर माणा गांव सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास और भक्ति का वातावरण देखने को मिला।
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