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पहले मानसून सीजन में इस प्रकार की स्थिति देखने को मिलती थी, मगर अब मानसून से पहले ही समस्या ने विकराल रूप धारण कर दिया है। जिस कारण चारधाम यात्रा में आ रहे श्रद्धालुओं के साथ ही रुद्रप्रयाग और चमोली की जनता भी खासी प्रभावित हो रही है और वे प्रदेश सरकार पर आक्रोश जता रहे हैं।
READ MOREमई महीने में अभी करीब एक हफ्ता बाकी है, लेकिन इसके बावजूद आंकड़े बताते हैं कि कैसे इस बार उत्तर भारत की तरह उत्तराखंड राज्य में भी बारिश महीने भर छाई रही। आंकड़ों के अनुसार पूरे प्रदेश में ओवरऑल अब तक सामान्य से 65 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। इसमें सबसे ज्यादा बारिश हरिद्वार जिले में रिकॉर्ड की गई। हरिद्वार में सामान्य से 175 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है।
READ MOREमद्महेश्वर धाम के प्रधान पुजारी शिवलिंग ने पंचांग पूजन के तहत अनेक पूजाएं संपन्न कर भगवान मदमहेश्वर समेत तैंतीस कोटी देवी-देवताओं का आह्वान किया। जिसके तहत सुबह 5 बजे भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली का भव्य श्रृंगार कर आरती उतारी गई। फिर भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली गौंडार गांव से कैलाश के लिए रवाना हुई।
READ MOREकेदारनाथ धाम यात्रा के संबध में सोशल मीडिया में झूठी अफवाह फैलाने वाले लोगों को लेकर तीर्थपुरोहित में आक्रोश है। तीर्थपुराहितों ने धाम व यात्रा के बारे में फैलाई जा रही अफवाहों पर यात्रियों से ध्यान ना देने की अपील की है। चारधाम यात्रा की सारी व्यवस्थाएं दुरूस्त है।
READ MOREइस वर्ष करीब 7000 डंडी कंडी और पिट्ठू संचालक श्री केदारनाथ धाम यात्रा के लिए पंजीकृत हैं। जिनका संचालन प्रतिदिन हो रहा है, घोड़े-खच्चरों को आराम मिलने के बाद से इनके माध्यम से ही पैदल यात्रा करने में असमर्थ श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंच रहे हैं वहीं पैदल यात्रा मार्ग से लेकर धाम तक खाद्य सामग्री सहित अन्य सामग्री भी इन्हीं लोगों की मदद से पहुंचाई जा रही है।
READ MOREजिलाधिकारी डॉ सौरभ गहरवार ने कहा कि यात्रा पर आने वाले किसी भी तीर्थ यात्री को परेशानी नहीं होनी चाहिये। प्रशासन का पूरा प्रयास है कि यात्री समय पर सुगमता से दर्शन कर सके। उन्होंने कहा कि यात्रा की हर समय मॉनेटरिंग की जा रही है।
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कपिल शर्मा ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया है। पॉलीहाउस के माध्यम से संरक्षित खेती, ड्रिप सिंचाई प्रणाली, उन्नत किस्म के बीज और जैविक उर्वरकों के संतुलित उपयोग से उन्होंने कम लागत में अधिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन हासिल किया।
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भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ धाम के कपाट इस वर्ष 22 अप्रैल को प्रातः 8 बजे वैदिक मंत्रोच्चार और पूर्ण विधि-विधान के साथ खोले जाएंगे।
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