Saturday , 5 September 2026
Home अतुल्य उत्तराखंड दून अस्पताल में ठंड से मरीज बेहाल हीटर नहीं, तीमारदारों के लिए भी कोई इंतज़ाम नहीं
अतुल्य उत्तराखंडउत्तराखंड न्यूज़एक्सक्लूसिवदेहरादूनस्पेशल

दून अस्पताल में ठंड से मरीज बेहाल हीटर नहीं, तीमारदारों के लिए भी कोई इंतज़ाम नहीं

देहरादून के प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र दून अस्पताल में इस समय हालात चिंताजनक हैं। प्रदेश में बढ़ती ठंड के बीच अस्पताल में भर्ती मरीजों को बिना हीटर के ही रातें गुजारनी पड़ रही हैं। खासकर जच्चा-बच्चा वार्ड, ऑर्थो, ईएनटी, मेडिसिन और कैंसर वार्ड में मरीज ठिठुरते हुए इलाज करा रहे हैं, जबकि अस्पताल प्रशासन की ओर से अब तक किसी भी वार्ड में हीटर लगाने की व्यवस्था नहीं की गई है।

सोमवार को जच्चा-बच्चा वार्ड की स्थिति सबसे ज्यादा खराब देखी गई। यहां नवजात शिशुओं की माताएँ ठंड से कांपती हुई बिस्तर में लिपटी मिलीं। कई महिलाओं ने बताया कि उन्हें गर्म रखने के लिए न तो हीटर उपलब्ध कराया गया है और न ही कमरे के खिड़कियों-दरवाज़ों की सीलिंग दुरुस्त की गई है। रात में तापमान गिरने के साथ ही ठंड असहनीय हो जाती है, जिससे मरीजों की सेहत पर खतरा बढ़ रहा है।

 

तीमारदारों की स्थिति भी कम खराब नहीं है। मरीजों की देखभाल करने आए लोग ठंड में बाहर बैठने को मजबूर हैं, क्योंकि अस्पताल में उनके ठहरने के लिए न तो कुर्सियों का उचित इंतज़ाम है और न ही किसी तरह की शेल्टर सुविधा। कई तीमारदारों को अस्पताल परिसर में इधर-उधर खड़े होकर ही पूरी रात गुजारनी पड़ रही है। कुछ लोग गर्म पानी की सुविधा के लिए घंटों इंतज़ार करते देखे गए, जबकि कई स्थानों पर गर्म पानी की मशीन ही काम नहीं कर रही थी।

ऑर्थो और कैंसर वार्ड में भी स्थिति अलग नहीं है। इन वार्डों में बड़ी संख्या में गंभीर मरीज भर्ती हैं, जिन्हें ठंड से बचाने के लिए अतिरिक्त गर्माहट की आवश्यकता होती है। इसके बावजूद यहां एक भी हीटर उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे मरीजों की परेशानी दोगुनी हो गई है। डॉक्टरों के अनुसार, ठंड बढ़ने के साथ कमजोर रोगियों के लिए संक्रमण व अन्य जटिलताओं का खतरा भी बढ़ जाता है। अस्पताल के मेडिकल स्टाफ मानते हैं कि हीटर की कमी से हालात और बिगड़ रहे हैं। कई नर्सों ने बताया कि उन्हें मरीजों को कंबलों की अतिरिक्त परत डालनी पड़ रही है, पर यह ठिठुरन को कम करने के लिए पर्याप्त नहीं है। वार्डों की स्थिति देखकर स्पष्ट है कि अस्पताल प्रशासन सर्दी के मौसम के लिए तैयार नहीं था, जबकि हर साल दून अस्पताल में दिसंबर-जनवरी के दौरान मरीजों की संख्या बढ़ जाती है।

शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में ऐसी अव्यवस्थाएँ चिंताजनक हैं। जहां नवजात बच्चों और प्रसूता महिलाओं की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए, वहीं आज वे बुनियादी सुविधाओं के अभाव में परेशान हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को सर्दी शुरू होने से पहले ही हीटर और अन्य व्यवस्थाओं का इंतज़ाम कर लेना चाहिए था।

ठंड बढ़ रही है और मरीजों की परेशानी भी… अब नज़रें केवल इस पर टिकी हैं कि कब दून अस्पताल प्रशासन मरीजों के लिए हीटर और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करेगा। जब तक ज़रूरी कदम नहीं उठाए जाते, तब तक सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीजों की ठिठुरन यथावत बनी रहेगी और सवाल भी कि आखिर जिम्मेदारी कौन लेगा?

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

प्रेशर हॉर्न पर अब सख्ती, दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹10 हजार चालान

उत्तराखंड में वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने और उनका अनावश्यक इस्तेमाल करने...