हिल-मेल के पॉडकास्ट में उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत पर किया पलटवार
एक सैनिक से सियासत तक का उनका सफर कुछ अलग रहा। मेडिकल ग्राउंड पर डिस्चार्ज होने के कारण सात साल बाद उन्हें सेना की सेवा छोड़नी पड़ी। वर्ष 1985 में पूर्व विधायक हरबंस कपूर के चुनाव में पोलिंग बस्ता लगाने से राजनीति की शुरुआत की। चार बार विधायक चुने गए और तीन बार कैबिनेट मंत्री बने।
उत्तराखंड की राजनीति अपनी विशिष्ट भौगोलिक संरचना, सैन्य पृष्ठभूमि और संवेदनशील जनसरोकारों के कारण देश के अन्य राज्यों से अलग है। ‘हिल-मेल’ डिजिटल के स्टूडियो में विजय नेगी और अंशुल नेगी ने उत्तराखंड के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की। इस साक्षात्कार ने उत्तराखंड के सियासी तापमान को बढ़ा दिया।
पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता डॉ. हरक सिंह रावत द्वारा लगाए गए कथित ‘भगोड़ा’ आरोप पर गणेश जोशी ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने सेना में शुरू की गई ‘अग्निवीर योजना’ की सैन्य उपयोगिता का पक्ष मजबूती से रखा। इनके अलावा, प्रदेश में बहुचर्चित सख्त ‘भू-कानून’ और पर्वतीय क्षेत्रों से ‘पलायन’ की चुनौती हो, या फिर उनके गृह विधानसभा क्षेत्र मसूरी की ट्रैफिक दुश्वारियां और परिवारवाद के आरोप, जोशी ने हर सवाल का जवाब अपने चिरपरिचित आक्रामक और बेबाक अंदाज में दिया।
“राजनीति में संयोग से आया, सेवा से जगह बनाई”
साक्षात्कार की शुरुआत में सैन्य पृष्ठभूमि से सियासत के शीर्ष तक पहुंचने के सवाल पर जोशी स्पष्ट करते हैं कि उनका या उनके पूरे परिवार का राजनीति से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था। उन्होंने विस्तार से बताया, “मैं राजनीति में बाय एक्सीडेंट (संयोगवश) आया हूं। 13 नवंबर 1976 को मैं सिपाही के रूप में गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हुआ था। 16 जून 1983 को सेवानिवृत्ति के उपरांत जनसेवा के सरोकारों ने मुझे सार्वजनिक जीवन की ओर आकर्षित किया।”
उनका कहना है कि “उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहे जनरल बी.सी. खंडूड़ी को अपना आदर्श माना और उन्हीं के पदचिन्हों पर चलते हुए अनुशासन और कार्यनिष्ठा का पाठ सीखा। राज्य के 70 विधायकों में उनकी कार्यशैली इसलिए अलग दिखती है, क्योंकि वे 24 घंटे जनता के लिए उपलब्ध रहते हैं, चाहे रात के दो बजे आपदा आ जाए या सुबह चार बजे किसी गरीब की पुकार हो।” बताते हैं कि “देहरादून में बन रहे ‘सैन्य धाम’ का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और जल्द ही इसका भव्य लोकार्पण किया जाएगा।”
हरक सिंह रावत के ‘भगोड़े’ वाले बयान पर तीखा पलटवार
वार्ता का सबसे तीखा और बहुचर्चित मोड़ तब आया जब कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत के उस बयान का उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने गणेश जोशी की फौजी पृष्ठभूमि पर सवाल उठाते हुए उन्हें कथित तौर पर ‘फौज का भगोड़ा’ कहा था। इस पर जोशी का आक्रोश और संयमित तंज साफ दिखाई दिया।
उन्होंने कहा, “हरक सिंह रावत जैसे नेताओं की बातों को अब राज्य की जनता गंभीरता से नहीं लेती। जो व्यक्ति मौसम और स्वार्थ के हिसाब से पार्टियां बदलता रहा हो और जिसकी खुद की राजनीतिक विश्वसनीयता शून्य हो चुकी हो, वह एक पूर्व सैनिक के चरित्र और सेवा पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं रखता।”
जोशी ने कहा कि “उनका सैन्य रिकॉर्ड सेना के आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज है।” स्पष्ट किया कि “नियमानुसार सात वर्ष की सेवा पूरी कर मेडिकल बोर्ड की सिफारिश पर सम्मानजनक तरीके से डिस्चार्ज हुए थे। सम्मानपूर्वक सेना से बाहर आकर सामाजिक कार्यों में जुटना और जनता द्वारा लगातार चार बार विधानसभा भेजा जाना ही उन विरोधियों के मुंह पर सबसे बड़ा तमाचा है, जो हताशा में ऐसे अनर्गल आरोप गढ़ते हैं।”
आईएएस ने फोन नहीं उठाया तो गुस्सा आया
पुराने विवादों पर जवाब देते हुए कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा, “आपदा के समय जब आईएएस अधिकारी ने फोन नहीं उठाया और जनता परेशान हो रही थी, तब जनता का दुख देखकर उनका गुस्सा फूटा था। वहीं, चर्चित शक्तिमान घोड़ा कांड पर उन्होंने कहा कि मीडिया ट्रायल के जरिए उनकी छवि खराब करने की साजिश हुई थी, लेकिन सच सामने आने पर जनता की सहानुभूति और समर्थन उनके साथ आया।
अग्निवीर योजना: “सेना को चाहिए युवा जोश और तकनीकी दक्षता”
एक पूर्व सैनिक होने के नाते कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से केंद्र सरकार की बहुचर्चित ‘अग्निवीर योजना’ पर रुख पूछा गया, जिसको लेकर उत्तराखंड सहित पूरे उत्तर भारत में खासा राजनीतिक विवाद रहा है। जोशी ने रक्षा विशेषज्ञों के तर्कों का समर्थन करते हुए कहा, “आधुनिक युद्ध तकनीकी, साइबर सुरक्षा और गतिशीलता पर आधारित हैं।
ऐसे में भारतीय सेना की औसत आयु को युवा और ऊर्जावान बनाना समय की मांग थी। चार साल की सेवा के बाद लौटने वाले युवाओं के लिए राज्य और केंद्र सरकार ने अर्धसैनिक बलों, पुलिस और कौशल विकास में प्राथमिकता के प्रावधान तय किए हैं।”
जोशी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि “विपक्षी मित्रों का काम केवल राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर सुधारात्मक कदम का अंधविरोध करना रह गया है।” उन्होंने दावा किया कि “देवभूमि का युवा देशभक्ति के जज्बे से लैस होकर पूरी ताकत से अग्निवीर भर्ती रैलियों में भाग ले रहा है।”
उत्तराखंड भू-कानून और बाहरी खरीद पर कड़े प्रतिबंध
उत्तराखंड के मूल निवासियों के अस्तित्व, संस्कृति और कृषि भूमि के संरक्षण से जुड़ा सबसे संवेदनशील मुद्दा ‘सख्त भू-कानून’ है। जब हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर सशक्त भू-कानून का सवाल किया, तो कैबिनेट मंत्री जोशी ने सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा,”सरकार ने राज्य की जनभावनाओं का सदैव आदर किया है।
बाहरी व्यक्तियों के लिए कृषि भूमि खरीद पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं और वर्तमान में केवल निर्धारित सीमा (250 वर्ग मीटर) तक आवासीय उपयोग की अनुमति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार एक संतुलित नीति पर काम कर रही है, जिसमें एक तरफ स्थानीय काश्तकारों की जमीनें सुरक्षित रहें और दूसरी तरफ प्रदेश के विकास, औद्योगिक निवेश और रोजगार के रास्ते भी न रुकें।
पहाड़ों से पलायन और कृषि क्रांति का रोडमैप
उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों के ‘घोस्ट विलेज’ (खाली होते गांव) और पलायन के संकट पर कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने अपने विजन को साझा करते हुए कहा, “पर्वतीय क्षेत्रों में परंपरागत खेती की जगह उच्च मूल्य वाली नकदी फसलों जैसे सेब, कीवी और सुगंधित पौधों की क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। लखपति दीदी योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को घर-घर जाकर मंडुआ खरीदने पर इंसेंटिव दिया जा रहा है।
उत्तराखंड के पारंपरिक अनाज (मंडुआ, झंगोरा) को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाकर किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य है। जब तक गांव में ही आर्थिक स्वावलंबन और सम्मानजनक आजीविका नहीं मिलेगी, तब तक पलायन नहीं थमेगा। इसके लिए सरकार सब्सिडी और मार्केटिंग तंत्र सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचा रही है।”
मसूरी विधानसभा: ट्रैफिक जाम, अतिक्रमण और कुठाल गेट टोल
मसूरी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक के रूप में स्थानीय बुनियादी ढांचे पर सवाल पर उनका कहना है, “मसूरी विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। वीकेंड और छुट्टियों में लगने वाले भीषण जाम से निपटने के लिए सड़कों के चौड़ीकरण, समानांतर वैकल्पिक मार्गों, बाईपास और बहुमंजिला पार्किंग परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है।”
जब यह सवाल उठा कि देहरादून-मसूरी मार्ग पर स्थित टोल बैरियर पर स्थानीय और उत्तराखंड के वाहनों पर टैक्स क्यों लिया जाता है, जबकि टिहरी-उत्तरकाशी के कुछ वाहनों को छूट है, तो जोशी ने स्पष्ट किया कि “प्रशासनिक व्यवस्था के तहत स्थानीय निवासियों और दैनिक यात्रियों को राहत देने के लिए नियमों का परीक्षण किया जा रहा है। उनका प्रयास है कि स्थानीय जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।”
उन्होंने बताया, “किमाड़ी मार्ग के चौड़ीकरण के लिए दो करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिसके बाद ट्रैफिक को ‘वन-वे’ किया जाएगा।”
परिवारवाद के आरोपों पर जोशी की सफाई
भाजपा जब कांग्रेस पर परिवारवाद का हमला बोलती है, तो विपक्ष गणेश जोशी पर अपनी पुत्री नेहा जोशी को संगठन में अहम पद दिलाने का आरोप लगाता है। इस सवाल पर जोशी ने कहा, “उनकी बेटी नेहा जोशी किसी वंशवादी विरासत के तहत सीधे पद पर नहीं बैठीं। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा के बाद पार्टी के राष्ट्रीय युवा मोर्चा में वर्षों तक राष्ट्रीय स्तर पर संगठन का काम किया।
विवाह के उपरांत जब उत्तराखंड लौटीं, तो उनके संगठनात्मक अनुभव और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने उन्हें प्रदेश संगठन में जिम्मेदारी सौंपी।” जोशी ने कहा, “परिवारवाद वह होता है, जहां बिना योग्यता और जमीनी संघर्ष के शीर्ष पद थोप दिए जाएं, जबकि उनके परिवार में हर व्यक्ति सामान्य कार्यकर्ता की तरह पसीना बहाकर आगे बढ़ रहा है।”
2027 विधानसभा चुनाव में 50 सीटों का दावा
उत्तराखंड क्रांति दल की वर्तमान स्थिति पर पूछे गए सवाल पर गणेश जोशी ने साफ कहा कि “राज्य आंदोलन के समय यूकेडी की जो भूमिका थी, जनता ने उसके बाद बार-बार राष्ट्रीय दलों पर ही भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की चुनावी राजनीति सीधे तौर पर दो-ध्रुवीय (भाजपा बनाम कांग्रेस) है और क्षेत्रीय दल हाशिए पर सिमट चुके हैं।
साक्षात्कार के अंतिम चरण ‘रैपिड फायर’ राउंड में कैबिनेट मंत्री जोशी ने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब दिए। उन्होंने कहा, “वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड में भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएगी और हमारा आंकड़ा 50 सीटों से ऊपर रहेगा। पार्टी हैट्रिक लगाने जा रही है।”
तंज भरे अंदाज में कहा कि “जब 50 से अधिक सीटें भाजपा जीतेगी, तो बची हुई 15-18 सीटों में कांग्रेस और अन्य दो-चार निर्दलीय अपना बंटवारा करते रहेंगे।” उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को कांग्रेस में सबसे बेहतर और जनाधार वाला नेता बताया।



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