उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों से उठी न्याय की एक आवाज अब देश की राजधानी तक पहुंचने की राह पर है। एक ओर जहां देश के जवान सीमाओं पर तैनात होकर राष्ट्र की सुरक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके परिवार के लोग अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
इसी संघर्ष की मिसाल हैं सरस्वती देवी, जिनके पति सेना में तैनात होकर देश की सेवा कर रहे हैं। लेकिन सरस्वती देवी स्वयं इन दिनों अन्य महिलाओं के साथ मिलकर एक बड़े आर्थिक घोटाले के खिलाफ न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं।
वे और उनके साथ करीब एक दर्जन महिलाएं उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल से दिल्ली तक पैदल मार्च कर रही हैं, ताकि अपनी आवाज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचा सकें।
क्या है LUCC घोटाला
यह पूरा मामला Loni Urban Multi State Credit & Thrift Co‑operative Society (LUCC) नामक एक मल्टी-स्टेट क्रेडिट सोसाइटी से जुड़ा है। आरोप है कि इस संस्था ने लोगों को ज्यादा ब्याज और जल्दी मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपये जमा कराए। बाद में कंपनी के संचालक फरार हो गए और हजारों लोगों की जमा-पूंजी डूब गई।
रिपोर्टों के अनुसार, उत्तराखंड में ही इस घोटाले में लगभग 90 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का मामला सामने आया, जबकि पूरे देश में यह रकम करीब 189 करोड़ रुपये तक बताई जाती है। इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जा चुकी है।
बताया जाता है कि कंपनी ने राज्य के कई जिलों में शाखाएं खोलकर छोटे निवेशकों, ग्रामीण परिवारों और महिलाओं को निवेश के लिए प्रेरित किया था। कई लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत, बच्चों की पढ़ाई या भविष्य की सुरक्षा के लिए जमा किए पैसे इसी संस्था में लगाए थे।
महीनों से जारी है संघर्ष
घोटाले के पीड़ितों का कहना है कि वे पिछले कई महीनों से न्याय की मांग कर रहे हैं। महिलाओं का दावा है कि वे 200–300 दिनों से अधिक समय तक धरना और प्रदर्शन कर चुकी हैं, लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हुई।
उन्होंने राज्य सरकार और प्रशासन के सामने कई बार अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने का अवसर भी नहीं मिला। यही कारण है कि अब उन्होंने सीधे देश के सर्वोच्च पद तक अपनी बात पहुंचाने का निर्णय लिया है।
राष्ट्रपति से मिलने की मांग
महिलाओं का यह समूह अब नई दिल्ली की ओर पैदल मार्च कर रहा है। उनका उद्देश्य है कि वे राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से मिलकर अपनी समस्या और न्याय की मांग उनके सामने रखेंगे।
कई दिनों से लगातार पैदल चल रही इस टोली को रास्ते में स्थानीय लोगों का समर्थन भी मिल रहा है। लोग उनके साहस और संघर्ष की सराहना करते हुए उन्हें पानी, भोजन और हौसला दे रहे हैं।
पहाड़ की नारी शक्ति का संघर्ष
यह आंदोलन केवल आर्थिक नुकसान की भरपाई का मामला नहीं है। यह उन हजारों परिवारों के विश्वास, सम्मान और व्यवस्था पर भरोसे से जुड़ा सवाल भी है, जिनकी मेहनत की कमाई इस घोटाले में डूब गई।
पहाड़ की इन महिलाओं का संघर्ष यह दिखाता है कि जब व्यवस्था से न्याय नहीं मिलता, तब आम नागरिक भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करना जानते हैं।
आज जब ये महिलाएं सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर राजधानी की ओर बढ़ रही हैं, तब यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर उन लोगों की जिम्मेदारी कौन लेगा, जिन्होंने अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए अपनी जमा-पूंजी किसी संस्था पर भरोसा करके सौंपी थी।







