नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में आयोजित यह बैठक प्रधानमंत्री स्तर की वार्ताओं के बाद तय एजेंडे को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से की गई। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने, वैश्विक चुनौतियों से निपटने और आपसी रणनीतिक सहयोग को और व्यापक बनाने पर सहमति जताई।
बैठक के दौरान आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति पर विशेष जोर दिया गया। भारत ने सीमा पार आतंकवाद और कट्टरपंथ से जुड़ी चिंताओं को अमेरिका के समक्ष प्रमुखता से रखा। वहीं अमेरिका ने भी आतंकवाद के खिलाफ भारत के प्रयासों की सराहना करते हुए खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और संयुक्त अभियानों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं ने एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा की। चीन की बढ़ती आक्रामक गतिविधियों, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा जैसे मुद्दे बातचीत के केंद्र में रहे। भारत और अमेरिका दोनों ने स्वतंत्र, सुरक्षित और खुला हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
रक्षा सहयोग को लेकर भी बातचीत काफी अहम मानी जा रही है। भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा तकनीक साझा करने और आधुनिक हथियार प्रणालियों के सहयोग पर लगातार काम हो रहा है। बैठक में रक्षा उत्पादन, उन्नत तकनीकों और साइबर सुरक्षा सहयोग को और बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श हुआ।
आर्थिक और तकनीकी साझेदारी भी इस वार्ता का एक प्रमुख हिस्सा रही। दोनों देशों ने आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने, उभरती तकनीकों, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देने पर चर्चा की। अमेरिका भारत को एक विश्वसनीय आर्थिक और रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है, जबकि भारत भी वैश्विक मंचों पर अमेरिका के साथ अपने संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में सक्रिय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया में अस्थिरता और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती नजदीकियां वैश्विक शक्ति संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
राजनयिक हलकों में इस बैठक को दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और मजबूत होते रिश्तों का संकेत माना जा रहा है। भारत और अमेरिका अब केवल पारंपरिक साझेदार नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीतिक सहयोगी के रूप में उभर रहे हैं। आने वाले समय में रक्षा, तकनीक, व्यापार और सुरक्षा के क्षेत्रों में दोनों देशों के संबंध और अधिक गहरे होने की संभावना जताई जा रही है।


Leave a comment