राज्य सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान मत्स्य विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पिथौरागढ़ के धारचूला और मुनस्यारी क्षेत्र की तीन मत्स्यजीवी सहकारी समितियों ने उच्च गुणवत्ता वाली रेनबो ट्राउट मछली का उत्पादन किया। इन मछलियों को कोल्ड-चेन व्यवस्था के तहत सुरक्षित रूप से गुजरात के वेरावल भेजा गया, जहां आधुनिक तकनीक से उनका प्रसंस्करण किया गया। इसके बाद 23 जून 2026 को नेपाल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनका सफल निर्यात किया गया।
इस निर्यात से जुड़े 33 मत्स्य पालकों को लगभग 23.50 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई है। मंत्री ने बताया कि इस पहले अंतरराष्ट्रीय निर्यात को सफल बनाने के लिए मत्स्य विभाग ने हार्वेस्टिंग, पैकेजिंग और परिवहन पर आने वाले अतिरिक्त खर्च को वहन करने हेतु 5.40 लाख रुपये की गैप फंडिंग सहायता उपलब्ध कराई।
सौरभ बहुगुणा ने कहा कि यह सफलता केवल एक निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के मत्स्य उद्योग के लिए वैश्विक बाजार के द्वार खोलने वाली उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि दुबई में आयोजित गल्फ फूड एक्सपो के दौरान अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और व्यापारिक हितधारकों से स्थापित संपर्कों का यह सकारात्मक परिणाम है। विभाग अब यूरोप, मध्य-पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों में भी ट्राउट मछली के निर्यात की संभावनाओं पर तेजी से कार्य कर रहा है। इसी दिशा में अगले चरण में लगभग 30 मीट्रिक टन मछली विदेशों में भेजने की तैयारी की जा रही है।
मंत्री ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में मत्स्य क्षेत्र में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि धामी सरकार की नीतियों ने मत्स्य पालन को रोजगार और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बनाया है। वर्ष 2024 में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के साथ किए गए एमओयू के तहत अब तक 45.10 मीट्रिक टन ट्राउट मछली की आपूर्ति की जा चुकी है, जिसकी कुल कीमत लगभग 2.10 करोड़ रुपये रही है। इससे राज्य के मत्स्य पालकों को स्थायी बाजार उपलब्ध हुआ है।
राज्य में मत्स्य क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। वर्ष 2022 तक जहां प्रदेश में 10,011 मत्स्य पालक थे, वहीं अब उनकी संख्या बढ़कर 15,657 हो चुकी है। इनमें 3,584 महिला मत्स्य पालक भी शामिल हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उत्पादन के आंकड़ों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2012 से 2017 के बीच मत्स्य उत्पादन वृद्धि दर केवल दो प्रतिशत थी, जो वर्ष 2022 से 2026 के दौरान बढ़कर 11 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वर्ष 2026-27 में राज्य में 11,805 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन दर्ज किया गया, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 165 करोड़ रुपये रही।
मत्स्य विभाग के बजट में भी पिछले कुछ वर्षों में कई गुना वृद्धि हुई है। वर्ष 2021-22 में विभाग का बजट 55.76 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर वर्ष 2026-27 में 261.41 करोड़ रुपये हो गया है। पिछले चार वर्षों में विभाग ने 5,646 मत्स्य पालकों के लिए स्वरोजगार के अवसर सृजित किए हैं, जबकि विभाग में 33 नियमित नियुक्तियां भी की गई हैं।
मंत्री ने कहा कि नवीन ट्राउट प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना सहित सरकार की कई योजनाएं अब गेम चेंजर साबित हो रही हैं। इन योजनाओं के चलते मत्स्य पालन केवल एक व्यवसाय नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आय वृद्धि और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की ट्राउट मछली वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाएगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।




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