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कहते हैं कि जब कोई जवान लड़ाई के दौरान अपनी खुखरी निकाल लेता है तो वह खून बहाए बिना म्यान में नहीं जाती। यह भारतीय सेना की गढ़वाल, कुमाऊं और गोरखा पलटनों का पारंपरिक हथियार रहा है। चीनी सैनिकों से झड़प के बाद अब इस धारदार हथियार की डिमांड बढ़ गई है।
READ MORE15 जून की रात गलवान घाटी में लड़ाई लगभग चार घंटे तक चलती रही। चीनी सैनिकों के पास तलवार और रॉड थे, जिनको छीनकर भारतीय सैनिकों ने उन पर करारी चोट की। इसके बाद चीनी भागने लगे और जान बचाने के लिए घाटियों में जा छिपे।
READ MOREपिछले 5 मई से ही भारत और चीन की सीमा पर तनाव चल रहा है लेकिन 15 जून को चीनी सैनिकों की हरकत से माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है। कई स्तर की वार्ता हो चुकी लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इधर, पूरा देश भारतीय शहीदों को नमन कर रहा है।
READ MOREएक महीने से लद्दाख में चीन के सैनिकों की हरकत ने दोनों देशों के बीच तनाव को भड़का दिया है। बीती रात दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हो गई है। इसमें तीन भारतीय जांबाजों की मौत की सूचना है, जिसके बाद से देशभर में चीन को लेकर गुस्सा देखा जा रहा है।
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कहते हैं कि जब कोई जवान लड़ाई के दौरान अपनी खुखरी निकाल लेता है तो वह खून बहाए बिना म्यान में नहीं जाती। यह भारतीय सेना की गढ़वाल, कुमाऊं और गोरखा पलटनों का पारंपरिक हथियार रहा है। चीनी सैनिकों से झड़प के बाद अब इस धारदार हथियार की डिमांड बढ़ गई है।
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15 जून की रात गलवान घाटी में लड़ाई लगभग चार घंटे तक चलती रही। चीनी सैनिकों के पास तलवार और रॉड थे, जिनको छीनकर भारतीय सैनिकों ने उन पर करारी चोट की। इसके बाद चीनी भागने लगे और जान बचाने के लिए घाटियों में जा छिपे।
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