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‘आस’ संस्था द्वारा आज ऋषिकेश में हरेला पर्व धूमधाम से मनाया गया। जिसके तहत उन्होंने उत्तराखंड को-ऑपरेटिव बैंक के साथ मिलकर महिलाओं को फलदार पेड़ भेंट किये।
READ MOREराष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान करनाल में भी हरेला पर्व पारंपरिक तरीके से मनाया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. चौहान उत्तराखंड से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने इस दौरान लोगों को हरेला का महत्व समझाते हुए कहा कि इस पर्व को हर गांव, शहर, देश को मनाना चाहिए क्योंकि यह हम सबके जीवन से जुड़ा है।
READ MOREहरी भरी धरती से खुशहाली का मंत्र देने वाला हरेला पर्व धूमधाम से पारंपरिक अंदाज में मनाया जा रहा है। सीएम कई कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने खुद पौधे लगाए और आधुनिक सुख-सुविधाओं के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत पर बल दिया।
READ MOREउत्तराखंड ही नहीं, यहां के लोग देश और दुनिया में जहां भी हैं आज हरेला उत्सव मना रहे हैं। कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी का संकट रहा हो या शहरों से संक्रमण के डर के चलते गांवों की तरफ आए लोग इस उत्सव की महत्ता को और भी समझने लगे हैं। आइए जानते हैं पूरी बात…
READ MOREहरेला उत्सव को उत्तराखंड से जोड़कर देखा जाता है लेकिन अब लोगों में जागरूकता बढ़ी है। 16 जुलाई को हरेला महोत्सव मनाया जाएगा। अब यह पूरे देश और विदेश में भी मनाया जाने लगा है। आइए इस महोत्सव के उस पहलू को समझते हैं जो यह बताता है कि इसका सीधे कनेक्शन हमारे शरीर और जीवन से है।
READ MOREजन मान्यताओं के अनुसार इस दिन गांव के हर व्यक्ति को एक पौधा अवश्य लगाना होता है। जब हरेला पौधों को किसी के शीश पर रखा जाता है तो इस दौरान एक सुंदर से आशीर्वचन के रूप में कुमाऊंनी बोली की कुछ पंक्तियां कही जाती हैं…।
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‘आस’ संस्था द्वारा आज ऋषिकेश में हरेला पर्व धूमधाम से मनाया गया। जिसके तहत उन्होंने उत्तराखंड को-ऑपरेटिव बैंक के साथ मिलकर महिलाओं को फलदार पेड़ भेंट किये।
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राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान करनाल में भी हरेला पर्व पारंपरिक तरीके से मनाया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. चौहान उत्तराखंड से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने इस दौरान लोगों को हरेला का महत्व समझाते हुए कहा कि इस पर्व को हर गांव, शहर, देश को मनाना चाहिए क्योंकि यह हम सबके जीवन से जुड़ा है।
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