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ग्रामीण स्तर पर चलने वाले हेल्थ सेंटरों की स्थिति छिपी नहीं है। डॉक्टरों की अनिवार्य तैनाती की कमी साफ नजर आती है। महज फॉर्मासिस्ट के भरोसे ये सेंटर चल रहे हैं। निश्चित तौर पर दवाओं की उपलब्धता एक बड़ा कारण हैं। कोविड मेडिसिन का जो अधिकृत इलाज उत्तराखंड सरकार के स्वास्थ्य महानिदेशालय की ओर से बताया गया है, कई जगह उसकी दवाएं नहीं हैं। दुर्गम इलाकों में कोरोना किट तो पहुंची लेकिन उनमें थर्मामीटर, ऑक्सीमीटर और कई अहम एंटीबॉयोटिक्स नहीं थे।
READ MOREबुधवार को 88 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। सबसे अधिक 26 मामले ऊधमसिंह नगर में सामने आए हैं। इसके अलावा देहरादून 16, बागेश्वर पांच, नैनीताल सात, पिथौरागढ़ एक, टिहरी गढ़वाल 17, पौड़ी गढ़वाल नौ और हरिद्वार के पांच मामले शामिल हैं। प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2623 हो गई है।
READ MOREप्रवासियों के आने की रफ्तार बढ़ने के साथ ही राज्य में कोरोना के केसों में भी उछाल आया है। 10 दिन में कोरोना के 24 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं।
READ MOREडीजीपी रतूड़ी ने जमातियों को 6 अप्रैल तक की समयसीमा देकर कहा था कि इसके बाद मरकज से लौटने की जानकारी छुपाने वाले लोग कोरोना संक्रमित पाए जाएंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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ग्रामीण स्तर पर चलने वाले हेल्थ सेंटरों की स्थिति छिपी नहीं है। डॉक्टरों की अनिवार्य तैनाती की कमी साफ नजर आती है। महज फॉर्मासिस्ट के भरोसे ये सेंटर चल रहे हैं। निश्चित तौर पर दवाओं की उपलब्धता एक बड़ा कारण हैं। कोविड मेडिसिन का जो अधिकृत इलाज उत्तराखंड सरकार के स्वास्थ्य महानिदेशालय की ओर से बताया गया है, कई जगह उसकी दवाएं नहीं हैं। दुर्गम इलाकों में कोरोना किट तो पहुंची लेकिन उनमें थर्मामीटर, ऑक्सीमीटर और कई अहम एंटीबॉयोटिक्स नहीं थे।
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बुधवार को 88 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। सबसे अधिक 26 मामले ऊधमसिंह नगर में सामने आए हैं। इसके अलावा देहरादून 16, बागेश्वर पांच, नैनीताल सात, पिथौरागढ़ एक, टिहरी गढ़वाल 17, पौड़ी गढ़वाल नौ और हरिद्वार के पांच मामले शामिल हैं। प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2623 हो गई है।
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