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केंद्र सरकार ने सीडीएस जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल 30 मई, 2026 तक बढ़ाया

केंद्र सरकार ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) और सैन्य मामलों के विभाग के सचिव के रूप में जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल 30 मई, 2026 तक बढ़ा दिया है।

केंद्र सरकार ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) और सैन्य मामलों के विभाग के सचिव के रूप में जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल 30 मई, 2026 तक बढ़ा दिया है। रक्षा मंत्रालय ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने 24 सितंबर 2025 को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के रूप में जनरल अनिल चौहान के सेवा विस्तार को मंजूरी दे दी है। वे 30 मई 2026 तक या अगले आदेश तक भारत सरकार के सैन्य मामलों के विभाग के सचिव के रूप में भी कार्य करेंगे।’

पिछले तीन सालों से जनरल अनिल चौहान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। जनरल अनिल चौहान ने देश के प्रथम सीडीएस जनरल बिपिन रावत के उत्तराधिकारी रूप में 30 सितंबर 2022 को चीफ ऑफ डिफेंस का पदभार संभाला था। इससे पहले वह नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में सैन्य सलाहकार की अहम जिम्मेदारी निभा रहे थे। वह सेना की पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ रहे। उन्हें साल 2019 में यह जिम्मेदारी दी गई थी। चीन के साथ चल रहे गतिरोध को देखते हुए देश की पूर्वी कमान का काम काफी अहम होता है। ऐसे में बहुत ही नाजुक हालात में उन्होंने देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा का जिम्मा संभाला।

सैन्य सेवा के लिए मिले कई पुरस्कार

जनरल अनिल चौहान ने आर्मी कमांडर बनने से पहले महानिदेशक सैन्य अभियान की जिम्मेदारी भी संभाली। 11 गोरखा राइफल में 1981 में कमीशन लेने वाले जनरल चौहान को जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के राज्यों में आतंकरोधी अभियानों का खासा अनुभव रहा है। उन्होंने भारत-चीन सीमा पर महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ पाकिस्तान के खिलाफ बालाकोट एयरस्ट्राइक में भी विशेष भूमिका निभाई थी।

पूर्वी कमान के प्रमुख रहे जनरल अनिल चौहान की निगरानी में ही उत्तरी सीमाओं पर मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए नवगठित 17 कोर में इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप की अवधारणा को आकार दिया जाना शुरू हुआ। खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और देहरादून की भारतीय सैन्य अकादमी के पूर्व छात्र रहे जनरल चौहान का विभिन्न कमांड, स्टाफ और निर्देशात्मक नियुक्तियों में एक प्रतिष्ठित करियर रहा है। जनरल अनिल चौहान को सैन्य सेवा के लिए परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से अलंकृत किया गया।

जनरल चौहान को है मुखौटे जमा करने का शौक

जनरल अनिल चौहान को मुखौटे जमा करने का नायाब शौक है। उनके पास दुनिया भर के मुखौटों का बेहतरीन कलेक्शन है। वह बताते हैं कि शुरूआत में नेपाल से कुछ मुखौटे खरीदे। यह महज सजाने के लिए थे लेकिन जब उन्हें अंगोला जाने का अवसर मिला तो वह एक अलग संस्कृति थी। दूसरे उपमहाद्वीप के मुकाबले अंगोला में मुखौटा का उद्देश्य ही अलग था। इसके बाद से उनका मुखौटे जमा करने का शौक बढ़ता चला गया। अब जब भी उन्हें दुनिया के किसी भी हिस्से में जाने का मौका मिलता है, मुखौटा जरूर खरीदते हैं। जनरल चौहान के पास इस समय 160 मुखौटों का कलेक्शन है। वह कहते हैं- ‘अगर कोई मुखौटा किसी संस्कृति का प्रतीक होता है तो मैं उसे जरूर खरीदता हूं।’

1961 में पैदा हुए अनिल चौहान

सीडीएस जनरल अनिल चौहान का जन्म 18 मई 1961 को दिल्ली में हुआ। उनकी पत्नी का नाम अनुपमा चौहान और बेटी का नाम प्रज्ञा चौहान है। सीडीएस मूलरूप से पौड़ी जिले के खिर्सू ब्लॉक के ग्रामसभा रामपुर कांडा गवाणा निवासी हैं। उनका परिवार दिल्ली में रहता है उनका पुश्तैनी घर देहरादून के वसंत विहार में है।

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Hill Mail

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