उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए बड़े स्तर पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। प्रदेश में शिक्षकों के 1,500 से अधिक रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। इनमें प्रवक्ता के 808 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पहले से चल रही है, जबकि प्रारंभिक शिक्षा में सहायक अध्यापक के 250 से अधिक पदों पर भर्ती के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इसके अलावा सहायक अध्यापक एलटी के 450 से अधिक पद भी रिक्त हैं। इन पदों को भरने के लिए जल्द ही उत्तराखंड लोक सेवा आयोग को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
राजकीय शिक्षक संघ के एससीईआरटी सभागार में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में सहायक अध्यापकों के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए जल्द विज्ञप्ति जारी की जाएगी। इसके लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
एलटी के रिक्त पदों पर भी होगी भर्ती
शिक्षा मंत्री ने कहा कि गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में सहायक अध्यापक एलटी के जितने भी पद रिक्त हैं, उन सभी को भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इसके लिए रिक्त पदों का विवरण तैयार कर आयोग को प्रस्ताव भेजा जाएगा। सरकार का प्रयास है कि लंबे समय से खाली पड़े शिक्षकों के पदों को जल्द भरा जाए, ताकि विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित न हो।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ने से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा। भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो, इसके लिए विभागीय स्तर पर भी लगातार निगरानी की जाएगी।
2,364 चतुर्थ श्रेणी पदों पर नियुक्ति
शिक्षा मंत्री ने बताया कि राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेजों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 2,364 पद खाली हैं। इन पदों को आउटसोर्स के माध्यम से भरने के लिए कंपनी का चयन किया गया था, लेकिन शिकायतों के बाद प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई। अब सरकार ने नियुक्ति व्यवस्था में बदलाव का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति का अधिकार देने पर विचार किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर नियुक्ति होने से विद्यालयों की जरूरत के अनुसार कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। इस प्रक्रिया में उन परिवारों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है, जिन्होंने विद्यालयों के लिए भूमि दान की है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
3,000 शिक्षकों को मिल सकती है तदर्थ पदोन्नति
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने शिक्षकों की लंबे समय से रुकी पदोन्नति को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पदोन्नति की प्रक्रिया में तेजी से काम किया जा रहा है और शिक्षकों की सूची राज्य लोक सेवा आयोग को भेजी जाएगी।
उन्होंने कहा कि यदि आयोग की ओर से पदोन्नति की प्रक्रिया में अधिक देरी होती है तो सरकार शिक्षकों को तदर्थ पदोन्नति देने पर विचार करेगी। इसके तहत सहायक अध्यापक एलटी से प्रवक्ता के करीब 3,000 पदों पर पदोन्नति का रास्ता खुल सकता है।
सरकार के इन फैसलों से एक ओर जहां विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर होने की उम्मीद है, वहीं लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे शिक्षकों को भी राहत मिलने की संभावना है। भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।








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