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पर्वत पुत्र जला रहा स्वच्छता की अलख

भवान सिंह किसी का जन्मदिन हो, शादी-विवाह हो या कोई और उत्सव, गिफ्ट में हाथ से बना कूड़ेदान भेंट करते हैं


हिल-मेल ब्यूरो

प्रेरणा लेकर ही काम करना है, यह हमेशा जरूरी नहीं होता। काम ऐसे भी किया जा सकता है कि खुद प्रेरणा बन जाए। समाझ के लिए कुछ कर गुजरने के जज्बे की ऐसी ही कहानी है कर्णप्रयाग के भवान सिंह रावत की। वह मेरा गांव-स्वच्छ गांव अभियान चला रहे हैं। जीवीके, श्रीनगर में उपप्रबंधक के पद पर कार्यरत भवानपुराने कनस्तरों, डिब्बों और गत्ते के खाली डिब्बों पर रंग-रोगन कर खुद कूड़ेदान तैयार करते हैं और उन्हें बांटते हैं। वह घरों के आसपास, मंदिर-मेले और दूसरे सार्वजनिक कार्यक्रमों शिरकत कर सिर्फ सफाई ही नहीं करते बल्कि दूसरे लोगों को भी अपनी इस मुहिम से जोड़ते हैं। वह गांव-गांव जाकर स्वच्छता अभियान चलाते हैं और लोगों को इसके लिए जागरूक करते हैं। किसी का जन्मदिन हो, शादी-विवाह, मुंडन या फिर कोई और उत्सव, वह गिफ्ट के रूप में बाकायदा अपने हाथ से बना कूड़ेदान भेंट करते हैं।भवान का कहना है कि बिना किसी सरकारी मदद के भी इस काम को आगे बढ़ाया जा सकता है। इसे समाजसेवा, देशसेवा, प्रकृति सेवा समझकर करना चाहिए।

26 जून 2017 को भवान ने मेरा गांव-स्वच्छ गांव अभियान की शुरुआत की। मेरा प्रयास लोगों को यह समझाने का होता है कि इसके लिए किसी मदद या धन की आवश्यकता नहीं होती। आप अपने आसपास की चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं। दरअसल, कई लोगों को लगता है कि वे गरीब हैं, सरकारी मदद के बिना ऐसे काम नहीं कर सकते। मैं उनमें यही विश्वास जगाने की कोशिश करता हूं कि प्रकृति की सेवा बिना पैसे खर्च किए भी की जा सकती है। मैं उनसे कहता हूं कि आपको जहां भी सड़क पर कोल्ड ड्रिंक की खाली बोतल मिले, उठा लीजिए। ऊपरी हिस्से को काटकर रस्सी की मदद से पेड़ पर बांध दीजिए और उसमें पानी भर दीजिए। इससे यह बोतलें पक्षियों के पानी पीने के काम आएंगे और कचरा भी कम हो जाएगा। हमें प्रकृति ने काफी कुछ दिया है, हमें भी उसे लौटाने का प्रयास करते रहना चाहिए। स्वच्छता सबसे सरल व जरूरी उपाय है। हम बिना पैसे खर्च किए इसमें भागीदार बन सकते हैं।

कंडारा गांव बन गया स्वच्छता का मॉडल

चमोली जिले के कंडारा गांव में 15 अगस्त 2017 भवान ने ग्रामीणों को अपने अभियान की सार्थकता बताई। ग्रामीणों की सहमति से तय हुआ कि हर महीने के पहले व तीसरे रविवार को गांव में स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। आज यहां बड़ा बदलाव आया है। गांव के सभी घरों में तेल के खाली डिब्बों को रंग रोगन कर सुंदर कूड़ादान बनाकर रखा गया है। गांव के पूरे रास्ते में हर 10 कदम पर इको फ्रेंडली कूड़ेदान बनाए गए हैं। राहगीर उन्हीं का प्रयोग करते हैं। गांव का प्रत्येक नागरिक बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक इस अभियान के कार्यकर्ता है। स्वच्छता अभियान के बाद गांव के पूरे रास्ते में चुना डाला जाता है। जिससे गांव में एक उत्सव का माहौल पैदा होता है। इसके लिए प्रत्येक परिवार से हर महीने एक एक रुपये जमा कराया जाता है। गांव से अनेक गांव के रास्ते गुजरते हैं, लोगों के पूछने पर गांव वाले बड़े गर्व के साथ बताते हैं हमारा गांव स्वच्छ गांव हैं। आज कंडारा पूरी तरह स्वच्छ गांव बन गया है।

धरती से हम बहुत कुछ लेते हैं, लेकिन जब देने की बारी आती है तो पीछे हट जाते हैं। ऐसे में जब प्रकृति अपना हिस्सा खुद वापस मांगती है, तो आपदाएं आती हैं। इसलिए जरूरी है कि समय-समय पर प्रकृति को उसका हिस्सा लौटाया जाए। इसके लिए हमें वह सब कुछ करना होगा, जिससे, प्रकृति का श्रृंगार होता है। साफ-सफाई भी इनमें से एक है।
– भवान सिंह

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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