उत्तराखंड में बढ़ा कोरोना का खतरा, 280 तबलीगी जमाती ‘लापता’

उत्तराखंड में बढ़ा कोरोना का खतरा, 280 तबलीगी जमाती ‘लापता’

उत्तराखंड में पिछले 24 घंटों में कोरोना का कोई भी मरीज सामने नहीं आया है। हालांकि राज्य से इस्लाम के प्रचार में निकले उन 280 तबलीगी जमात के लोगों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है, जिनके बारे में कोई खबर नहीं मिल रही है।

कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने में सरकार के प्रयासों को एक धार्मिक सभा के आयोजन से झटका लगता दिख रहा है। दिल्ली में कुछ दिनों पहले बड़ी संख्या में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में देश के कोने-कोने से लोग शामिल हुए थे और एक-दो दिन पहले तक हजार से ज्यादा लोग निजामुद्दीन स्थित मरकज में मौजूद थे। कोरोना से इनमें से करीब 8 लोगों की मौत होने के बाद देशभर के उन राज्यों में हड़कंप मचा हुआ है, जहां से ये लोग आए थे। पहले यह सूचना था कि उत्तराखंड से 34 लोग आए दिल्ली के इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे। हालांकि अब जो जानकारी सामने आ रही है, उसने उत्तराखंडियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। उत्तराखंड में कोरोना का एक बड़ा खतरा मंडराने लगा है।

 

बताया जा रहा है कि उत्तराखंड के करीब 280 लोग देश के अलग-अलग राज्यों में तबलीगी जमात के तहत इस्लाम का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। चिंता की बात तो यह है कि अभी तक पता ही नहीं चला है कि उत्तराखंड के ये लोग कहां हैं। अब सरकार के लिए चुनौती ये है कि इन लोगों का जल्दी से पता लगाए और इनकी पहचान कर सोशल डिस्टेंसिंग में रखें, जिससे कोरोना संक्रमण को दूसरे लोगों में फैलने से रोका जा सके।

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जो 280 लोग ‘लापता’ बताए जा रहे हैं, वे देहरादून, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी और हरिद्वार के हैं। ऐसे में पूरे उत्तराखंड में कोरोना का खतरा बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि जमाती जब घर से निकलते हैं तो धर्म का प्रसार करने के सिलसिले में 40 दिन तक बाहर रहते हैं।

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राहत की बात अभी यह है कि पिछले 24 घंटों में कोरोना का राज्य में कोई नया मामला सामने नहीं आया है लेकिन दुनियाभर के जमातियों के केंद्र निजामुद्दीन मरकज पहुंचे उत्तराखंडियों और देशभर में मौजूद 280 लोगों में अगर कोरोना का संक्रमण फैला तो राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जो कुछ हद तक अभी हालात को नियंत्रण में रखने सफल होती दिख रही है।

त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार लगातार लोगों से अपील कर रही है कि कोरोना को फैलने से रोकने का एक ही तरीका है और वह है सामाजिक दूरी। 21 दिनों के लॉकडाउन के दौरान घर में ही रहें और बिना किसी इमर्जेंसी के कहीं न जाएं। लोगों से मेल-मुलाकातें बंद रखें।

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