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ऋषिकेश में कोर्ट आदेश पर भारत साधु समाज की 34 दुकानें कराईं गईं खाली

ऋषिकेश। भारत साधु समाज की दुकानों को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद बुधवार को निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया, जब जिला प्रशासन की टीम ने न्यायालय के आदेश पर 34 दुकानों को खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी। यह कार्रवाई कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच की गई, जिसमें भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी को मौके पर तैनात किया गया था। प्रशासन की इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए विशेष निगरानी रखी गई, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो।
जानकारी के अनुसार, यह विवाद वर्षों से चला आ रहा था और भारत साधु समाज द्वारा इन दुकानों के स्वामित्व एवं उपयोग के अधिकार को लेकर लगातार कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही थी। पहले उच्च न्यायालय और फिर सर्वाेच्च न्यायालय तक मामले को पहुंचाया गया। हालांकि, दोनों ही अदालतों ने भारत साधु समाज की याचिकाओं को खारिज कर दिया और प्रशासन के पक्ष में फैसला सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन को स्पष्ट निर्देश मिले कि वह न्यायिक आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करे और विवादित संपत्ति को सरकारी नियंत्रण में ले। इसी क्रम में बुधवार को तड़के प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और कार्रवाई प्रारंभ की। अतिक्रमण हटाने की इस कार्यवाही में प्रशासन ने पहले दुकानदारों को समझाया और समय सीमा के भीतर स्वयं सामान हटाने को कहा। इसके बाद जो दुकानें खाली नहीं की गई थीं, उन्हें प्रशासन की निगरानी में सील कर दिया गया या उनका सामान हटाया गया। इस कार्रवाई के दौरान कुछ दुकानदारों ने विरोध भी जताया, लेकिन सुरक्षा बलों की मौजूदगी और अधिकारियों की सख्ती के चलते कोई बड़ा विवाद या हिंसा नहीं हुई। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पूरी तरह न्यायिक आदेशों के तहत की गई है और इसमें किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं किया गया है।
प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि “यह कार्रवाई उच्च न्यायालय और सर्वाेच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के तहत की गई है। भारत साधु समाज को सभी स्तरों पर न्याय की प्रक्रिया का अवसर दिया गया। अब जबकि न्यायालय का अंतिम निर्णय आ चुका है, प्रशासन के पास आदेश का पालन कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।” उन्होंने आगे बताया कि इन दुकानों का पुनः उपयोग अब नगर विकास की योजना के अनुसार किया जाएगा और यदि किसी भी व्यक्ति को कोई आपत्ति है तो वह विधिक माध्यमों से अपनी बात रख सकता है।
उधर, भारत साधु समाज से जुड़े कुछ सदस्यों ने प्रशासन की कार्रवाई पर निराशा जताई और कहा कि वे इस मुद्दे पर पुनः कानूनी सलाह लेकर आगे की रणनीति बनाएंगे। हालांकि, संपूर्ण कार्रवाई कानून व्यवस्था को बनाए रखते हुए, शांतिपूर्वक और निष्पक्ष रूप से पूरी की गई। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी यदि किसी अन्य अतिक्रमण या विवादित संपत्ति पर न्यायालय के आदेश आते हैं, तो उन्हें भी इसी तरह निष्पक्ष रूप से निष्पादित किया जाएगा। यह कार्रवाई न केवल एक पुराने विवाद का अंत प्रतीत हो रही है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि प्रशासन अब अतिक्रमण व न्यायिक आदेशों की अनदेखी को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा।

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Hill Mail

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