लंबे समय बाद केदारनाथ पहुंचे कर्नल कोठियाल, निर्माण कार्यों का लिया जायजा

लंबे समय बाद केदारनाथ पहुंचे कर्नल कोठियाल, निर्माण कार्यों का लिया जायजा

कर्नल कोठियाल इस समय पूर्वोत्तर में सामरिक रूप से अहम एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं और केदारनाथ में चल रहे कार्यों को देखने के लिए दिल्ली से सीधे केदारनाथ पहुंचे। इस दौरान उन्होंने केदारनाथ के पुरोहितों से मुलाकात की और केदारनाथ में चल रहे विभिन्न कार्यों का जायजा लिया।

केदारनाथ में साल 2013 में आई विनाशकारी आपदा के बाद केदार घाटी के कायाकल्प में मुख्य भूमिका निभाने वाले कर्नल (रिटा.) अजय कोठियाल शुक्रवार को लंबे समय बाद बाबा केदार के धाम पहुंचे। कर्नल कोठियाल इस समय पूर्वोत्तर में देश के लिए सामरिक रूप से अहम एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। वह कुछ जरूरी काम से इन दिनों से दिल्ली में हैं। इस बीच वह समय निकालकर केदार धाम में चल रहे कार्यों की प्रगति देखने के लिए दिल्ली से सीधे वहां पहुंचे। इस दौरान उन्होंने केदारनाथ के पुरोहितों से मुलाकात की और केदारनाथ में चल रहे विभिन्न कार्यों का जायजा लिया।

उन्होंने यहां बनाई जा रही आदिगुरु शंकराचार्य की समाधि, सरस्वती नदी के घाट के सौंदर्यीकरण और तीर्थ पुरोहितों के लिए बन रहे आवासों का काम देखा।

 

केदारनाथ दौरे के बाद उन्होंने अपनी फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘हम 4-5 दिनों के लिए Myanmar/Burma से वापस आए और केदार बाबा का बुलावा आ गया… दर्शन भी हो गए… शिव खुद सबसे बड़े अघोरी हैं और ये किस्मत वाला संयोग है कि आज इस देव स्थान में …अघोरी बाबा से मुलाकात भी हो गई… एक अलग शक्ति का अहसास भी हुआ…।
जय भोले।’

 

केदारनाथ में पुनर्निर्माण के कई कार्य तेजी गति से आगे बढ़ रहे हैं। केदारनाथ में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों की निगरानी सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से हो रही है। केदारनाथ में चल रहे कार्य पीएम मोदी के उस ड्रीम प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं, जिसके तहत केदारपुरी को दिव्य और भव्य स्वरूप दिया जा रहा है। केदारनाथ में आदिगुरु शंकराचार्य की समाधि का निर्माण हो रहा है। कर्नल कोठियाल की प्रेरणा से ही वुडस्टोन कंस्ट्रक्शन केदारनाथ में कई तरह के निर्माण कार्यों में जुटी है। कुछ दिन पहले केंद्रीय संस्कृति सचिव ने केदारनाथ का दौरा कर कामकाज का जमीनी जायजा लिया था।

 

केदारनाथ मंदिर के पीछे आदि गुरु शंकराचार्य की समाधि स्थित है। समाधि के लिए तीन मीटर चौड़ा रास्ता तैयार हो रहा है, जो मुख्य मंदिर के पीछे करीब 60 मीटर की दूरी पर होगा। वुडस्टोन के अधिकारियों के मुताबिक, यह काम तीन चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में खुदाई का काम किया गया। दूसरे चरण में निर्माण का काम चल रहा है। तीसरे चरण में समाधि की सजावट का काम होना है। 8 मीटर की गोलाई में बन रही इस समाधि के निर्माण कार्य की समयसीमा दिसंबर, 2020 है। इसके बाद समाधि में खास तरह की साजसज्जा का भी काम होना है। मौसम की तमाम दिक्कतों के बावजूद समाधि का निर्माण कार्य निरंतर चल रहा है।

इस समाधि में गोलाई में नीचे जाने के लिए एक रैंप होगा , जो लगभग इस गोलाई के 2 चक्कर मे पूरा होगा। नीचे समाधि स्थल पर योग भी किया जा सकेगा। समाधि से बाहर आने के लिए एक अलग रैंप होगा, जो भैरवनाथ मंदिर के लिए खुलेगा।

उत्तराखंड के युवाओं के साथ पूर्वोत्तर में एक मिशन में जुटे हैं कर्नल कोठियाल

इस समय कर्नल कोठियाल एक नए मिशन में जुटे हुए हैं। राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़ा यह मिशन उत्तराखंड से सैकड़ों किलोमीटर दूर पूर्वोत्तर की सीमा पर अंजाम दिया जा रहा है। भारत सरकार की ओर से कर्नल कोठियाल को टास्क दिया गया है, म्यांमार सीमा तक सड़क तैयार करने का, ताकि भारत के पड़ोसी देशों में चीन की हरकतों पर नजर रखी जा सके।

वह इस समय अपनी टीम के साथ म्यांमार से लगती सीमा पर एक बड़े रोड प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इस काम में उनके साथ उत्तराखंड के कई युवा जुटे हैं। कर्नल कोठियाल ने कुछ समय पहले खुद अपने फेसबुक एकाउंट से इस नए मिशन की जानकारी साझा की थी। उन्होंने एक पोस्ट में लिखा था, ‘बहुत समय से हमारी तरफ अच्छे विचार रखने वालों के संदेश आ रहे हैं। हम जिस जगह पर हैं, वहां नेटवर्क नहीं होने के कारण हम जवाब नहीं दे पाए, माफी चाहते हैं। पिछले 7 महीने से हम Burma/Myanmar (विदेश) में हैं…।

भारत की Act East Policy के तहत Burma में एक अंतरराष्ट्रीय रोड कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट है, जिसका नाम Kaladan Multi-Model Transit Transport Project (KMMTTP) है…।

Burma में जिस इलाके से यह रोड बनाई जा रही है, यहां तकरीबन रोज Myanmar Army और Arakan Army के बीच गोलीबारी (फायरिंग) चलती रहती है…।

खतरनाक जंगल, जानलेवा मलेरिया, जहरीले सांप, बिच्छू, बहुत तेज बरसात, अत्यधिक गर्मी इस इलाके की कुछ खासियतें हैं…।

यह माना जा सकता है कि केदारनाथ पुनर्निर्माण से तकरीबन 10 गुनी ज्यादा मुश्किलें इस प्रोजेक्ट में है। इस बीच यहां कुछ जानलेवा हादसे भी हमारे साथ हो चुके हैं… हमारा अपहरण भी हुआ था, जिसमें हमारे एक साथी की जान चली गई थी। वह आपको मालूम ही होगा…। लेकिन… यूथ को रोजगार प्रदान करने का यह एक बहुत बड़ा प्लेटफार्म है… इसलिए हमें यहां काम करने में बहुत मजा आ रहा है।

सेना से रिटायरमेंट के बाद फौज जैसा ही काम करने का मौका मिल रहा है। हमें यह समझ आता है कि युवाओं को ऐसे काम करने में बहुत मजा आता है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव राकेश शर्मा सर, जिन्होंने हमें केदारनाथ में काम करने का मौका दिया, यहां पर भी उन्होंने ही हमको काम करने का मौका दिया है। उत्तराखंड का युवा केदारनाथ पुनर्निर्माण में भी हमारे साथ था…उत्तराखंड का युवा यहां पर भी हमारे साथ है…।

एक बार यह कार्य सही तरीके से चलना शुरू हो जाए, तब जल्द ही हम उत्तराखंड आएंगे…। दुआओं की जरूरत है, आशीर्वाद की जरूरत है, अंतरराष्ट्रीय ख्याति वाला यह कार्य जरूर पूरा होगा।’

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